ईरान ने इजरायल के डिमोना शहर पर मिसाइल हमला किया, जिससे दर्जनों लोग घायल हो गए। डिमोना में इजरायल का प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान भी स्थित है। यह हमला इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खुलासे और इतिहास से जुड़ा है।
तेल अवीव: ईरान ने इजरायल के डिमोना शहर पर हमला कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरान ी मिसाइल हमले में डिमोना में दर्जनों लोगों के घायल होने की सूचना है। डिमोना दक्षिणी इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। यहीं पर इजरायल का प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान भी है, जिसे नेगेन न्यूक्लियर रिसर्स सेंटर के नाम से जाना जाता है। इजरायल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी तक गुप्त रखा है। उसने न तो परमाणु हथियार रखने की पुष्टि की है और ना ही इसका खंडन किया है। हालांकि, 1980 के दशक में मोर्दचाई वनुनु नाम के एक व्यक्ति ने पहली बार दुनिया के सामने इजरायल ी परमाणु हथियारों का सबूत पेश किया था। इजरायल आज भी इस व्यक्ति को गद्दार मानता है और इसकी कड़ी निगरानी करता है। मोर्दचाई वनुनु ने लीक किया था इजरायल ी परमाणु कार्यक्रम मोर्दचाई वनुनु इजरायल के पूर्व परमाणु टेक्निशियन हैं। अब उन्हें दुनिया में एक शांति कार्यकर्ता के रूप में देखा जाता है। वनुनु ने ही 1986 में ब्रिटिश प्रेस को इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का विवरण उजागर किया था। इसके बाद दुनिया को इजरायल के परमाणु कार्यक्रम की सच्चाई पता चली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, इजरायल के पास लगभग 90 परमाणु वॉरहेड हैं। हालांकि इजरायल ने कभी आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की बात स्वीकार नहीं की है। इजरायल ने ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस कारण इजरायल के परमाणु प्रतिष्ठान इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की निगरानी प्रणाली के तहत नहीं आती हैं।मोसाद मोर्दचाई वनुनु को लंदन से इजरायल कैसे ले गईबीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 1986 में मोर्दचाई वनुनु ने 'द सन्डे टाइम्स' को इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी और तस्वीरें दी थी। इसके बाद से ही मोर्दचाई वनुनु की नजर में आ गए। बाद में उन्हें इजरायल ी खुफिया एजेंसी की एक महिला जासूस लंदन से इटली की राजधानी रोम लेकर गई। वहां उन्हें नशीला पदार्थ देकर गुप्त रूप से इजरायल लेकर जाया गया। इजरायल पहुंचने पर मोर्दचाई वनुनु पर बंद कमरे में देशद्रोह का मुकदमा चला और उन्हें 18 साल जेल की सजा सुनाई गई। कहा जाता है कि इनमें से 11 साल से अधिक समय उन्होंने एकांत कारावास में बिताया, हालांकि इस तरह के किसी प्रतिबंध का उल्लेख इजरायल के कानून में नहीं है। मोर्दचाई वनुनु को कई बार किया गया गिरफ्तार2004 में जेल से रिहा होने के बाद भी मोर्दचाई वनुनु के बोलने और कहीं भी आने-जाने पर कई तरह से प्रतिबंध लगाए गए। उन्हें पैरोल की शर्तों के उल्लंघन, विदेशी पत्रकारों को इंटरव्यू देने और इजरायल छोड़कर भागने की कोशिश करने के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया। उनका दावा है कि जेल अधिकारियों ने उनके साथ 'क्रूर और बर्बर व्यवहार' किया। वनुनु ने यह भी दावा किया है कि अगर उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया होता तो हालात कुछ और होते। मोर्दचाई वनुनु को मिला राइट लाइवलीहुड अवार्ड मोर्दचाई वनुनु को 2007 में वनुनु को पैरोल की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई। मई 2010 में वनुनु को फिर से गिरफ्तार किया गया और उन पर विदेशियों से मिलने के आरोप में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई, जो 2004 में जेल से उनकी रिहाई की शर्तों का उल्लंघन था। मोर्दचाई वनुनु को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक व्हिसलब्लोअर के रूप में जाना जाता है। उन्हें इसके लिए राइट लाइवलीहुड अवार्ड से सम्मानित किया गया था।.
तेल अवीव: ईरान ने इजरायल के डिमोना शहर पर हमला कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरानी मिसाइल हमले में डिमोना में दर्जनों लोगों के घायल होने की सूचना है। डिमोना दक्षिणी इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। यहीं पर इजरायल का प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान भी है, जिसे नेगेन न्यूक्लियर रिसर्स सेंटर के नाम से जाना जाता है। इजरायल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी तक गुप्त रखा है। उसने न तो परमाणु हथियार रखने की पुष्टि की है और ना ही इसका खंडन किया है। हालांकि, 1980 के दशक में मोर्दचाई वनुनु नाम के एक व्यक्ति ने पहली बार दुनिया के सामने इजरायली परमाणु हथियारों का सबूत पेश किया था। इजरायल आज भी इस व्यक्ति को गद्दार मानता है और इसकी कड़ी निगरानी करता है।मोर्दचाई वनुनु ने लीक किया था इजरायली परमाणु कार्यक्रम मोर्दचाई वनुनु इजरायल के पूर्व परमाणु टेक्निशियन हैं। अब उन्हें दुनिया में एक शांति कार्यकर्ता के रूप में देखा जाता है। वनुनु ने ही 1986 में ब्रिटिश प्रेस को इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का विवरण उजागर किया था। इसके बाद दुनिया को इजरायल के परमाणु कार्यक्रम की सच्चाई पता चली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, इजरायल के पास लगभग 90 परमाणु वॉरहेड हैं। हालांकि इजरायल ने कभी आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की बात स्वीकार नहीं की है। इजरायल ने ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस कारण इजरायल के परमाणु प्रतिष्ठान इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की निगरानी प्रणाली के तहत नहीं आती हैं।मोसाद मोर्दचाई वनुनु को लंदन से इजरायल कैसे ले गईबीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 1986 में मोर्दचाई वनुनु ने 'द सन्डे टाइम्स' को इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी और तस्वीरें दी थी। इसके बाद से ही मोर्दचाई वनुनु की नजर में आ गए। बाद में उन्हें इजरायली खुफिया एजेंसी की एक महिला जासूस लंदन से इटली की राजधानी रोम लेकर गई। वहां उन्हें नशीला पदार्थ देकर गुप्त रूप से इजरायल लेकर जाया गया। इजरायल पहुंचने पर मोर्दचाई वनुनु पर बंद कमरे में देशद्रोह का मुकदमा चला और उन्हें 18 साल जेल की सजा सुनाई गई। कहा जाता है कि इनमें से 11 साल से अधिक समय उन्होंने एकांत कारावास में बिताया, हालांकि इस तरह के किसी प्रतिबंध का उल्लेख इजरायल के कानून में नहीं है।मोर्दचाई वनुनु को कई बार किया गया गिरफ्तार2004 में जेल से रिहा होने के बाद भी मोर्दचाई वनुनु के बोलने और कहीं भी आने-जाने पर कई तरह से प्रतिबंध लगाए गए। उन्हें पैरोल की शर्तों के उल्लंघन, विदेशी पत्रकारों को इंटरव्यू देने और इजरायल छोड़कर भागने की कोशिश करने के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया। उनका दावा है कि जेल अधिकारियों ने उनके साथ 'क्रूर और बर्बर व्यवहार' किया। वनुनु ने यह भी दावा किया है कि अगर उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया होता तो हालात कुछ और होते।मोर्दचाई वनुनु को मिला राइट लाइवलीहुड अवार्डमोर्दचाई वनुनु को 2007 में वनुनु को पैरोल की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई। मई 2010 में वनुनु को फिर से गिरफ्तार किया गया और उन पर विदेशियों से मिलने के आरोप में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई, जो 2004 में जेल से उनकी रिहाई की शर्तों का उल्लंघन था। मोर्दचाई वनुनु को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक व्हिसलब्लोअर के रूप में जाना जाता है। उन्हें इसके लिए राइट लाइवलीहुड अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
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