कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर प्रश्न उठाते हुए प्रश्नों को तेज किया। उन्होंने बताया कि छात्रों को मिली अंक कम और परिणामों में गड़बड़ी के कारण लाखों छात्रों का भविष्य जोखिम में है। वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी चिंता व्यक्त की।
देश भर में सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता के.
सी.
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वेणुगोपाल के अनुसार, इस नई व्यवस्था में आई कथित गड़बड़ियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने इसे एक गंभीर प्रशासनिक विफलता के रूप में वर्णित किया और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। OSM प्रणाली के तहत, परीक्षकों को छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल स्क्रीन पर दिखाई जाती हैं और वहीं अंक दिए जाते हैं। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। परंतु अब इस प्रणाली को लेकर विवाद भड़क रहा है। वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बताया कि काफी छात्रों और अभिभावकों ने रिज़ल्ट में भारी गड़बड़ियों की शिकायतें की हैं। वे दावा करते हैं कि कई छात्रों को अपेक्षा से बहुत कम अंक मिले हैं, जिसके कारण उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश और भविष्य के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, परीक्षा परिणामों से नाराज हुए कई छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर भी गहरा असर पड़ा है। पत्र में पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के प्रति भी गहरी चिंता जताई गई है। वेणुगोपाल ने उल्लेख किया कि उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगने की अंतिम तिथि आधी रात को समाप्त हो चुकी है, जबकि पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 29 मई है। ऐसे में छात्रों के पास अपनी कॉपी देखने और आवश्यक कदम उठाने के लिए बहुत कम समय बचता है। इस स्थिति ने छात्रों और अभिभावकों में भारी तनाव पैदा कर दिया है, और कई छात्रों का डर है कि यदि वे समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते हैं, तो वे कॉलेज के प्रवेश और आगे की पढ़ाई के अवसर खो सकते हैं। वह यह भी बतौर दोषारोपण लाते हैं कि एक प्रणालीगत विफलता का बोझ छात्रों पर डाल दिया गया है, जिससे वे आर्थिक, शैक्षणिक और मानसिक दबावों का सामना कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट रूप से लिखा कि कोई भी छात्र सिर्फ तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ियों की वजह से अपने करियर के अवसरों से वंचित न हो। उन्होंने केंद्र सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की, ताकि छात्रों को राहत देने के लिए समयबद्ध समाधान लागू किया जा सके। इस बहस के बीच शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ दोनों ने CBSE तथा सरकार से जवाब मांगते हुए पारदर्शी जाँच और शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई है। सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार और CBSE इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि यह मामला केवल अंक की बात नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य, भरोसे और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा है
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