लाखों मिडिल क्लास घरों में बहस शुरू हो गई है कि इन काम करने वालों को घर में आने दें या नहीं?
एक दोस्त ने एक बार कहा था कि उसे अपने पति और घरेलू मेड में किसी एक को चुनना पड़े तो वह घरेलू मेड को चुनेगी.
लेकिन बीते छह सप्ताह के दौरान भारत के लाखों मिडिल क्लास परिवारों को बिना मेड, कुक, बच्चों की देखभाल करने वाली नैनी, नर्स, ड्राइवर और माली के काम चलाना पड़ा क्योंकि सख्त लाकडॉउन के चलते यह सब लोग काम के लिए कहीं आ जा नहीं सकते थे.शुरुआत में यह लॉकडाउन केवल तीन सप्ताह के लिए लगाया था तो लोगों ने इसे स्वीकार किया क्योंकि उन्हें लगा कि तीन हफ्तों की ही बात है. इस दौरान कुछ बॉलीवुड सितारों ने अपने घरों में साफ़ सफ़ाई करते, खाना बनाते और बर्तन धोते वीडियो भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए.
घरेलू हेल्पर मुहैया कराने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हेल्पर4यू की प्रमुख मीनाक्षी गुप्ता जैन ने बताया,"कइयों की नौकरी चली गई और कइयों का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें सैलरी नहीं मिल रही है." सोनिका वर्मा ने बताया,"इन सभी सप्ताहों के दौरान मैं काफ़ी तनाव में रही. मेरे पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं. लेकिन ऑटो चलाने पर रोक के चलते वे घर पर बैठे हुए हैं. मैं भी काम पर नहीं जा पा रही थी. मैं डरी हुई थी कि अगर मेरी नौकरी चली गई तो हम लोग क्या करेंगे?"सोनिका ने बताया,"वे जिनके यहां काम करती थीं उन लोगों ने उसे मार्च में केवल उतने ही दिन की ही सैलरी दी. अप्रैल का कोई भुगतान नहीं हुआ. उन लोगों ने कहा था कि काम पर लौटने के बाद ही पैसा मिलेगा.
नोएडा की पॉश सोसायटी एटीएस ग्रीन्स के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि घरेलू हेल्परों को अंदर आने के मामले पर उनकी सोसायटी तैयार है. उन्होंने बताया,"हमारे यहां 735 अपार्टमेंट्स हैं. इसमें कइयों में सीनियर सिटीजन अकेले रहते हैं. इनमें कइयों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हमने इन बातों को ध्यान में रखा है."
इन लोगों को काम पर वापस बुलाने पर छोक्कर ने कहा,"हम बुलाना चाहते हैं. इससे हमारी मुश्किल काफ़ी कम हो जाएगी."मेरी पड़ोसी पिंकी भाटिया रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं, वह घरेलू हेल्पर को काम पर वापस बुलाने के मुद्दे पर थोड़ी चिंतिंत हैं हालांकि उनकी पीठ में तकलीफ है और बिना किसी मदद के घरेलू कामों में उन्हें बेहद मुश्किल होती है.
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