आज के दौर में हर दूसरा व्यक्ति काम की टेंशन के चलते अपने खानपान पर ध्यान नहीं दे पाता है। ऐसे में उनको पर्याप्त पोषण न मिलने की वजह से धीरे-धीरे विटामिन और न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है उनके मन में सवाल उठता है कि क्या इसकी वजह से डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है? आगे जानते हैं इसका सही जवाब क्या...
आज के दौर में हर दूसरा व्यक्ति काम की टेंशन के चलते अपने खानपान पर ध्यान नहीं दे पाता है। ऐसे में उनको पर्याप्त पोषण न मिलने की वजह से धीरे-धीरे विटामिन और न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है उनके मन में सवाल उठता है कि क्या इसकी वजह से डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है?
आगे जानते हैं इसका सही जवाब क्या है?
आजकल विटामिन डी की कमी एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। पहले इसे केवल हड्डियों और कैल्शियम से संबंधित माना जाता था, लेकिन अब कई रिसर्च में यह सामने आया है कि विटामिन डी की कमी शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक विटामिन डी का स्तर कम रहने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है। भारत में बड़ी संख्या में लोग पर्याप्त धूप नहीं लेते, जिसके कारण शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। लंबे समय तक विटामिन डी की कमी के कारण, आंतों द्वारा कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण में कमी आती है, जिससे हाइपोकैल्सीमिया हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को सेकेंडरी हाइपरपैराथायरायडिज्म का जोखिम भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि विटामिन डी शरीर के कई कार्यों के लिए आवश्यक माना जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि विटामिन डी और डायबिटीज के बीच क्या संबंध है और इसकी कमी को कैसे दूर किया जा सकता है।के अनुसार विटामिन डी केवल व्यक्तियों की हड्डियों तक ही सीमित नहीं होता है, बल्कि यह इंसुलिन की प्रक्रिया के लिए भी सहायक होता है। इंसुलिन शरीर के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जिन लोगों को विटामिन डी की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से या इंसुलिन के सही कार्य न कर पाने की वजह सेक्या विटामिन डी की कमी और डायबिटीज से माइक्रोवैस्कुलर का खतरा भी बढ़ जाता है?
जब किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी और डायबिटीज एक साथ होती है, तो इन दोनों ही स्थितियों में माइक्रोवैस्कुलर रोग का जोखिम बढ़ जाता है। माइक्रोवैस्कुलर रोगों यानी छोटी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ना। आपको बता दें कि माइक्रोवैस्कुलर सिस्टम शरीर की बहुत छोटी रक्त वाहिकाओं का एक तरह का जाल होता है, जिन्हें मेडिकल जगत में केशिकाएं कहा जाता है। ये शरीर के हर हिस्से तक खून पहुंचाने का काम करती हैं। शरीर मेंसे होने वाली सूजन ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती है। जिससे छोटी रक्त वाहिकाओं में ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और इससे माइक्रोवैस्कुलर रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।के अनुसार डायबिटीज के साथ भी माइक्रोवैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन्स हो सकती है। इसमें डायबिटिक रेटिनोपैथी , नेफ्रोपैथी और न्यूरोपैथी शामिल हैं।की विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए आप रोजाना सुबह 6 से 8 के बीच करीब 20 से 30 मिनट धूप में बैठें या वॉक करें।नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। आप इसमें जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक, योगासन जैसे मंडूकासन आदि को शामिल कर सकते हैं। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन भी कर सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेने से आपको अन्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। अगर आपको लंबे समय से कमजोरी, थकान या हाई ब्लड शुगर की समस्या है तो 25D टेस्ट करवाना उपयोगी हो सकता है। विटामिन डी की कमी और डायबिटीज के बीच संबंध को लेकर कई रिसर्च सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लो विटामिन डी लेवल इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। हालांकि केवल विटामिन डी की कमी को डायबिटीज का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद
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