Maharashtra Shiv Sena Factions Reunion (Alliance) Suspense Possibility Analysis; Follow Maharashtra MLC Chunav, Uddhav Thackeray, Eknath Shinde, Ambadas Danve, Abdul Sattar Latest News, Headlines And Reports On Dainik Bhaskar.
MLC चुनाव में खींचतान, कार्यकर्ता बोले- विचारधारा एक, हाईकमान के ऑर्डर का इंतजारमहाराष्ट्र का समृद्धि एक्सप्रेस-वे। उद्धव ठाकरे खेमे के बड़े नेता अंबादास दानवे और एकनाथ शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार का काफिला आमने-सामने आ गया। दोनों नेताओं ने गाड़ी से उतरकर एक-दूसरे को गले लगाया। इनकी मुलाकात की तस्वीइसके बाद अंबादास दानवे ने मीडिया में कहा- वक्त आ गया है कि दोनों शिवसेना एक हो जाएं। ये मेरे अकेले के चाहने से नहीं होगा, दोनों तरफ से इच्छा होनी चाहिए। अब्दुल सत्तार ने जवाब में कहा- शिंदे साहब रजामंदी दें, तो दोनों पार्टियों को एक होने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा। उद्धव गुट के नेता अंबादास दानवे और शिंदे गुट के अब्दुल सत्तार समृद्धि एक्सप्रेसवे पर रुककर एक-दूसरे के गले मिले। 18 जून को महाराष्ट्र की 16 सीटों पर MLC चुनाव होने हैं। इससे पहले शिवसेना के दोनों नेताओं का मिलना और गठबंधन की बात करना चर्चा में क्यों है,BJP ने चुनाव में संभाजी नगर-जालना सीट से सुहास शिरसाट को उम्मीदवार बनाया है। शिंदे गुट ने भी इस सीट पर दावा किया था। ये शिवसेना का पारंपरिक गढ़ है, इसलिए दोनों के दावों से खींचतान बढ़ गई है। अविभाजित शिवसेना का गढ़ रही औरंगाबाद-जालना सीट पर भी BJP ने अपना उम्मीदवार उतारा है। इससे भी शिंदे गुट में नाराजगी दिखी।उद्धव और शिंदे, दोनों खेमों के नेताओं का मानना है कि BJP धीरे-धीरे सहयोगी दलों की राजनीतिक जमीन पर कब्जा कर रही है। शिवसेना के नेता अंबादास दानवे और शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार ने खुलेआम BJP को चुनौती बताया।क्या 4 साल पहले अलग हुई शिवसेना एक होने जा रही है?
इस पर एकनाथ शिंदे के करीबी नासिक जिलाध्यक्ष अजय बोरास्ते कहते हैं, ‘महाराष्ट्र का हर शिवसैनिक चाहता है कि दोनों गुट एक हो जाएं, लेकिन हमारे लीडर्स के मन में क्या है, ये कोई नहीं जानता। दोनों तरफ बालासाहेब के आदर्शों को मानने वाले हैं, इसलिए कार्यकर्ता यही चाहते हैं कि दोनों पार्टियां फिर एक हो जाएं।' 'महाराष्ट्र में BJP जैसे काम कर रही है, उससे सहयोगी दलों के लिए हालात बहुत बदल गए हैं। NCP का हाल सब देख रहे हैं। लेकिन हमारे शिंदे साहब फाइटर हैं, इसलिए सब कंट्रोल में है।’ शिवसेना UBT उद्धव गुट के नेता प्रथमेश गीते भास्कर से कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में शिवसेना एक नंबर की पार्टी रही है। ये अलग बात है कि राजनीतिक मतभेदों के कारण हम दो गुटों में बंट गए, लेकिन नाम अब भी एक ही है। सब साथ होंगे, तो अच्छा रहेगा।’ ’अभी MLC चुनावों के लिए नामांकन हुआ। सब देख रहे हैं कि BJP क्या कर रही है। कई पुराने उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला। अगर दोनों शिवसेना साथ काम करें, तो मजबूती से चुनाव लड़ सकेंगे।’महाराष्ट्र विधान परिषद की नामांकन प्रक्रिया के दौरान संभाजीनगर-जालना निर्वाचन क्षेत्र को लेकर BJP और शिवसेना के बीच मतभेद दिखा। दोनों पार्टियां यहां से अपना उम्मीदवार उतारना चाहती थीं। शिवसेना के वरिष्ठ कार्यकर्ता नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ‘कभी औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद पर शिवसेना का एकछत्र राज था। 2022 में पार्टी टूट गई। आज इन दोनों प्रमुख निकायों पर BJP ने कब्जा जमा लिया है।’ संभाजीनगर-जालना सीट पर शिवसेना पिछले 20 साल से ज्यादा समय से चुनाव लड़ती आ रही थी। इस बार BJP ने यहां से सुहास शिरसाट को टिकट दे दिया। इससे शिंदे गुट नाराज है। ’शिंदे गुट यहां से सिल्लोड MLA अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार को टिकट देना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विरोध में समीर ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। मामला बढ़ता देख CM देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को नामांकन वापस लेने के लिए फोन करना पड़ा। समीर सत्तार ने नाम वापस ले लिया, लेकिन इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में मैसेज गया है कि हम भले गठबंधन के साथी हैं, लेकिन BJP अपनी मर्जी से टिकट बांट रही है।’ महाराष्ट्र MLC चुनाव में 4 जून को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख के बाद कई विपक्षी उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिया। जिसके बाद महायुति ने 6 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली। लिहाजा, चुनावी मुकाबला अब घटकर 11 सीटों पर आ गया है।उद्धव गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत महायुति गठबंधन में बढ़ती बेचैनी का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने 2 जून को कहा कि 2022 में एकनाथ शिंदे का साथ देने वाले नेताओं को अगर फैसले पर पछतावा है, तो उन्हें उद्धव ठाकरे की पार्टी में लौट जाना चाहिए। उनका स्वागत है। संजय ने BJP पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘अगर शिंदे गुट के नेताओं को लगता है कि BJP शिवसेना को खत्म कर रही है, तो उन्हें अपने उन नेताओं से सवाल करना चाहिए, जो अब भी BJP के साथ चमचों की तरह काम कर रहे हैं।’डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने गठबंधन की बात से न इनकार किया, न हामी भरी। वे महायुति कैंडिडेट रविंद्र फाटक के ठाणे-पालघर निकाय सीट पर नामांकन दाखिल करने के बाद बोल रहे थे।विलय की अटकलों पर BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन प्रेम शुक्ला कहते हैं, ‘झूठ फैलाया जा रहा है। दूर-दूर तक ऐसी संभावना नहीं दिख रही है। पार्टी के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे भी साफ कर चुके हैं कि महायुति का हिस्सा बनकर महाराष्ट्र के लोगों की सेवा करते रहेंगे।’ रही बात MLC चुनावों में महायुति में टिकट बंटवारे को लेकर उठे मतभेद की, तो सारे विवाद सेटल हो चुके हैं। BJP, शिवसेना और NCP के कैंडिडेट्स चुनावों के लिए तैयार हैं।महाराष्ट्र में शिवसेना की गतिविधियों पर 20 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट पांडुरंग म्हस्के कहते हैं, ‘शुरुआती दौर से जुड़े शिवसैनिक आज भी 'मातोश्री' के प्रति ही ईमानदार हैं। शिंदे के साथ यही दिक्कत रही कि वो कभी विश्वसनीय नेता नहीं बन सके।‘ शिवसेना टूटने पर ज्यादातर विधायक सिर्फ पैसे और पोजीशन के लिए शिंदे गुट में चले गए। उनका जुड़ाव आज भी 'मातोश्री' से ही है। इसलिए शिवसैनिक जब भी हताश होता है, उसे 'मातोश्री' ही आखिरी उम्मीद लगती है। ‘एकनाथ शिंदे फाइनेंशियल तौर पर मजबूत हैं। वो महायुति में रहते हुए BJP को इसलिए चैलेंज कर पा रहे हैं, क्योंकि उन पर दिल्ली का हाथ है। देवेंद्र फडणवीस भी ये अच्छे से जानते हैं। ये भी सुगबुगाहट है कि वो 'मातोश्री' के टच में हैं। संभव है कि BJP शिवसेना की पावर खत्म कर उसके एक-एक विधायक 'मातोश्री' को ट्रांसफर कर सकती है,जो शिंदे की पार्टी के प्रभाव पर असर डाल सकता है।’ ’उद्धव ठाकरे पार्टी से जुड़ी छोटी सी बात भी बेहद गंभीरता से लेते हैं। जितना मैं जानता हूं, 2022 में हुई बगावत के बाद वो कभी भी शिंद से गठबंधन नहीं करेंगे।’महाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं, ’शिवसेना में दोनों गुट के नेता भले एक दूसरे के पक्ष में बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि विधानसभा चुनाव तक इनके बीच कोई अलायंस होगा। पहले भी शिंदे गुट में ऐसी टूट की बातें सामने आईं हैं, लेकिन शिंद ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया।’ ’महायुति में रहते हुए BJP जैसे शिवसेना को साइडलाइन कर रही है, उससे बौखलाकर शिंदे गुट के कुछ नेताओं ने निगेटिव स्टेटमेंट दिए। अभी के समीकरणों को देखते हुए पार्टी के पास BJP का साथ छोड़ने की कोई वजह नहीं है।’17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था।जमकर बरस रहा प्री-मानसून...
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