तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने विजय, एक अभिनेता के रूप में सफलता हासिल करने के बाद राजनीति में कदम रखा।
जयललिता ने बैन की थी Vijay की फिल्म, अब उन्हीं की कुर्सी पर बैठे 'थलाइवा'; सालों पहले दिए थे राजनीति में आने के संकेत तमिलनाडु में जोसफ विजय (Joseph Vijay) की जीत अनायास ही नहीं, बरसों की मेहनत से बुना हुआ करिश्मा है। उनके पूर्ववर्ती एमजीआर और करुणानिधि की तरह इसकी इबकुछ आंकड़े समय के साथ हम भूल जाते हैं, लेकिन कभी कभी धुंध को साफ करने के लिए उन्हें याद करना आवश्यक हो जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि द्रमुक और अन्ना द्रमुक यानी करुणानिधि (Karunanidhi) और एम.
जी. रामचंद्रन के परिवारों के मध्य बारी-बारी से झूलती तमिलनाडु की सत्ता स्वतंत्रता के बाद पहली बार एक कथित गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति जोसफ विजय चंद्रशेखर तक पहुंची है।तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए पहली बार चुनाव लड़ रही विजय (Vijay) की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) 108 सीटें जीतकर विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उल्लेखनीय है कि किसी भारतीय राज्य में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले वे चौथे अभिनेता हैं। पहले अभिनेता जिन्होंने मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में सफलता पाई थी, वे एम.
जी. रामचंद्रन थे। Vijay के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद Rajinikanth का आया पहला रिएक्शन, इंटरनेट पर वायरल हुआ वीडियो 1977 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए पहली बार चुनाव लड़ रही उनकी पार्टी एआइएडीएमके ने स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई थी। तमिलनाडु में ही 1991 के विधानसभा चुनाव में अभिनेत्री रही जयललिता (Jayalalitha) के एआइएडीएमके के अलायंस ने दो तिहाई से भी अधिक बहुमत से सरकार बनाई। ऐसा ही चमत्कार 1983 में आंध्र प्रदेश में अभिनेता एन. टी.
रामाराव ने कर दिखाया था,जब मात्र 9 महीने पहले गठित उनकी तेलगु देशम पार्टी ने 280 सदस्यों की विधानसभा में 201 सीटें हासिल कर सरकार बनाई।आज जोसफ विजय तमिल सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कलाकारों में शुमार किए जाते हैं। उन्हें भारत में सबसे अधिक फीस लेने वाले अभिनेता भी कहा जाता है। उनके फैन क्लब पूरे तमिलनाडु में सक्रिय हैं। उनकी फिल्में 500-600 करोड़ तक की कमाई कर रही हैं। विजय के पिता एस. ए.
चंद्रशेखर तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक थे, उन्होंने 1992 में 18 वर्ष की उम्र में ‘नालैया थिरुपु’ के साथ बेटे को लांच किया, मगर क्रिटीक्स और दर्शकों ने पूरी तरह फिल्म को नकार दिया।पिता ने उन्हें अभिनेता विजयकांत के साथ ‘सेंथूरपंडी’ में एक बार फिर मौका दिया, लेकिन यह फिल्म भी नकार दी गई। एक के बाद एक एस. ए.
चंद्रशेखर विजय को मुख्य भूमिका में लेकर ‘रासिगन’, ‘देवा’, ‘विष्णु’ जैसी फिल्में बनाते गए। मगर विजय को सफलता बाहर के बैनर में मिलनी थी, जो उन्हें 1996 में स
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