ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। इसमें आम आदमी के साथ-साथ इंडस्ट्री का भी बजट बिगाड़ दिया है। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीनों में डिपॉजिट घटने के बावजूद क्रेडिट ग्रोथ तेजी से बढ़ी। इस मांग को आंशिक रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ा रही...
तेल ने आम लोगों के साथ इंडस्ट्री का भी बिगाड़ा खेल, बैंक क्रेडिट ग्रोथ में दो साल में सबसे तेज बढ़ोतरीईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। इसमें आम आदमी के साथ-साथ इंडस्ट्री का भी बजट बिगाड़ दिया है। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीनों में डिपॉजिट घटने के बावजूद क्रेडिट ग्रोथ तेजी से बढ़ी। इस मांग को आंशिक रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ा रही हैं। कच्चे तेल की कीमत में तेजी ने आम आदमी के साथ-साथ इंडस्ट्री का भी बजट बिगाड़ दिया है। इस फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीनों में डिपॉजिट घटने के बावजूद क्रेडिट ग्रोथ तेजी से बढ़ी। इससे फंडिंग गैप बढ़ गया और बैंकों में लिक्विडिटी की तंगी बढ़ गई। 31 मई तक लोन और डिपॉजिट के बीच का अंतर लगभग ₹3.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया। बैंकर्स का कहना है कि इस मांग को आंशिक रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ा रही हैं। कच्चे तेल में उछाल के बाद उनका मार्जिन प्रभावित हुआ है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मई, 2026 को खत्म हुए पखवाड़े में क्रेडिट ग्रोथ 17.7% रही। यह चालू वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा और जून 2024 के बाद से सालाना आधार पर सबसे मजबूत बढ़ोतरी है। 31 मार्च, 2026 के बाद से बकाया बैंक क्रेडिट में ₹1.5 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जो 0.7% की वृद्धि को दर्शाता है। इसके साथ ही कुल क्रेडिट ₹215.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया। RBI FCNR Swap Scheme: चल गया 'बेवकूफी वाला आइडिया'...
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इस दौरान डिपॉजिट का ट्रेंड इसके उलट रहा। 31 मार्च, 2026 के बाद से कुल बैंक डिपॉजिट में ₹2.3 लाख करोड़ यानी 0.9% की कमी आई। इससे 31 मई, 2026 तक कुल डिपॉजिट ₹260 लाख करोड़ रहा। बढ़ते क्रेडिट और घटते डिपॉजिट के बीच कारण चालू वित्त वर्ष के सिर्फ दो महीनों में ही ₹3.8 लाख करोड़ का अंतर हो गया। पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर में डिपॉजिट में ₹36.5 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई थी जबकि इस दौरान क्रेडिट में ₹31.1 लाख करोड़ की वृद्धि हुई थी। डिपॉजिट ग्रोथ में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है। यह आम तौर पर 9% से 13% के दायरे में रही है। 31 मई, 2026 तक डिपॉजिट ग्रोथ 12.2% थी, जो क्रेडिट ग्रोथ से 5 फीसदी पीछे थी। इस कारण अक्टूबर 2025 के बाद से क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो 80% से ऊपर चला गया है। मार्च 2026 के आखिर में यह 83% से ज्यादा के पीक पर पहुंच गया था। उसके बाद मई 2026 में यह 82.8% पर आ गया। महामारी के दौरान जब लिक्विडिटी की भरमार थी, तब यह रेश्यो नवंबर 2021 में 69.6% पर आ गया था। RBI ने रेपो रेट 5.25% पर ही रखा, क्या EMI में कोई बदलाव होगा, क्या अभी लोन पर घर खरीदना सही फैसला है?
एक्सपर्ट से समझें बैंकों ने क्रेडिट की ज्यादा मांग को पूरा करने के लिए अपनी बैलेंस शीट में बदलाव किए हैं। उन्होंने सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कम कर दिया है। जनवरी 2026 में ऐसी होल्डिंग्स में ग्रोथ गिरकर लगभग 2% रह गई थी लेकिन 31 मई 2026 तक थोड़ी सुधार के साथ 4.9% हो गई। निवेश में यह कमी इस बात का संकेत है कि डिपॉजिट कम जमा होने के बीच लिक्विडिटी को फ्री करने की जरूरत है।दिल प्रकाश, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर है। वह 20 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने खेल, राजनीति, संसद, विदेश, विज्ञान, रक्षा और बिजनेस जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है। दिल प्रकाश पांच साल से भी अधिक समय से एनबीटी डिजिटल के साथ जुड़े हैं। इससे पहले वह देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता और बिजनेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीबीसी हिंदी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के रूप में कई साल काम किया है। यूनीवार्ता में कई साल तक स्पोर्ट्स डेस्क पर काम करने के बाद नेशनल ब्यूरो में कई विषयों पर रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्हें हॉकी वर्ल्ड कप, क्रिकेट वर्ल्ड कप और कॉमनवेल्थ गेम्स को कवर करने का मौका मिला। साथ ही उन्होंने डिफेंस करेंसपोंडेंट कोर्स भी किया है। इस दौरान उन्हें रक्षा बलों के काम करने के तरीके को करीब से देखने का मौका मिला। दिल प्रकाश ने नई दिल्ली के भारतीय विद्या भवन संस्थान से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद
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