दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के लाभ के लिए मरीजों को अब कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। दस आयुष्मान मित्रों को प्रशिक्षित करअगर आप किसी हादसे का शिकार हो गए हैं और आप आयुष्मान योजना के पात्र हैं, तो योजना का लाभ लेने के लिए अब फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के किसी भी वार्ड की चौखट लांघना नहीं होगा।
दुमका अस्पताल में आयुष्मान योजना का लाभ अब बिस्तर पर, मरीज ों को नहीं लगाने होंगे चक्कर। दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के लाभ के लिए मरीज ों को अब कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। दस आयुष्मान मित्र ों को प्रशिक्षित करअगर आप किसी हादसे का शिकार हो गए हैं और आप आयुष्मान योजना के पात्र हैं, तो योजना का लाभ लेने के लिए अब फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के किसी भी वार्ड की चौखट लांघना नहीं होगा। डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए अब कार्यालय का चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल प्रबंधन पुरानी लचर इस व्यवस्था को समाप्त कर नई की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए दस आयुष्मान मित्र ों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद सभी को वार्ड में टैब के साथ नियुक्त किया जाएगा और ये लोग मरीज के पास जाकर योजना का लाभ के लिए सारी प्रक्रिया पूरी करेंगे। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहले जिस किसी मरीज को आयुष्मान योजना का लाभ लेना होता था, उसे उसी हालत में कार्यालय जाना पड़ता, जिस हालत में उसका इलाज चल रहा था। स्वजन अपने मरीज को या तो स्ट्रेचर पर या फिर किसी सहारे से पहली मंजिल पर चल रहे आयुष्मान कार्यालय लेकर आते थे। यहां पर उनका डिजिटल हस्ताक्षर लेकर और कई प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था। मंगलवार को जरमुंडी के गम्हरिया गांव का पक्कू दास अपनी सास नीरा देवी को जली हुई अवस्था में स्ट्रेचर से लेकर कार्यालय पहुंच गया। बताया कि सास खाना बनाने के क्रम में झुलस गई। आयुष्मान योजना का कार्ड होने पर अस्पताल के कार्यालय से संपर्क किया तो कहा गया कि मरीज को लेकर आओ, तभी योजना का लाभ मिल पाएगा। मरता क्या न करता। पक्कू सास को स्ट्रैचर से ही कार्यालय ले गया। ऐसे न जाने कितने मरीज हैं जो गंभीर हालत के बाद भी केवल हस्ताक्षर के लिए कार्यालय का चक्कर काटते हैं। कॉलेज प्रबंधन ने बुधवार से नई व्यवस्था पर काम करना शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दस आयुष्मान मित्र ों को डाटा इंट्री से लेकर मरीज ों का डिजिटल हस्ताक्षर लेने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तीन दिन के प्रशिक्षण के बाद सभी अस्पताल के सभी वार्ड में टैब देकर नियुक्त किया जाएगा। ये मित्र मरीज के पास जाकर आयुष्मान से संबंधी सारी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद मरीज ों को पांच से 15 लाख रुपया तक की योजना से जोड़ दिया जाएगा। मरीज को जख्मी हालत में कार्यालय जाते देख खराब लगता था, इसलिए हर वार्ड में आयुष्मान मित्र ों को तैनात करने का निर्णय लिया है। मित्रों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब मरीज को उसके बिस्तर पर ही योजना के लाभ से जोड़ दिया जाएगा। आयुष्मान मित्र मरीज के पास जाकर सारी कागजी प्रक्रिया पूरी करेंगे। -डॉ.
रूबेन हेंब्रम, अधीक्षक फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दुमक
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