धर्म और समाज का संगम -लालदास बैरागी और दारा शिकोह

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दारा शिकोह आध्यात्मिक विषयों के बहुत बड़े लेखक थे। उनका लेखन कार्य वर्ष 1639 में शुरू हुआ, जब उन्होंने सफीनात अल औलिया नाम का ग्रंथ पूर्ण किया।

राज सिंह सनातन धर्म की वैष्णव परंपरा ने विश्व को अनेक महान संत दिए हैं। इनमेंं से रामानंदी संप्रदाय के संत, बाबा लालदास बैरागी को एक विशेष स्थान प्राप्त है। वे स्वामी रामानंद की चौथी पीढ़ी के संत थे। उनका स्थान पंजाब में अमृतसर से ‘ध्यानपुर’ नामक स्थान पर है। बाबा लालदास का स्थान, 52 बैरागी द्वारों में से एक है, जिसे ‘लाल तुरंगी’ द्वारा भी कहते हैं। इस द्वारे से दीक्षित बैरागी समाज के लोग, ‘लाल तुरंगी’ गोत्र के रूप में प्रयोग करते हैं। वर्तमान में भी इस पीठ का महत्त्वपूर्ण स्थान है। लाल तुरंगी...

उस परंपरा और सोच को बदल दिया ,जिनके अनुसार केवल मुसलिम ही महान रहस्यवादी के स्तर तक पहुंचने के योग्य माने जाते थे। मुकालम ए बाबा लाल ओ दारा शिकोह, सुआल वा जवाब नामक ग्रंथ, दारा शिकोह और बाबा लालदास बैरागी के बीच हुई उस बातचीत का संकलन है जो वर्ष 1653 में हुई। इस ग्रंथ में दारा शिकोह द्वारा बाबा लालदास से किए गए प्रश्नों से स्पष्ट है कि उससे पहले ही दारा शिकोह रामायण और भगवत गीता का अध्ययन कर चुके थे। इस प्रक्रिया में उनका सनातन धर्म से गहरा रिश्ता कायम हो चुका था और उन्हें इस्लाम एवं सनातन धर्म...

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