Agriculture News: अगर नवंबर में अजवाइन की खेती करनी है, तो अभी से बुवाई शुरू कर दें. इस महीने मिट्टी में नमी संतुलित रहती है, जिससे बीज तेजी से अंकुरित होते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सिंचित खेतों में नवंबर की बुवाई से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.
देखा जाए तो अक्टूबर से नवंबर का महीना अजवाइन की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम में तापमान और नमी का संतुलन बीज अंकुरण के लिए आदर्श रहता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर की गई बुवाई से उपज में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा सकती है.
अजवाइन की खेती दो तरीकों से की जाती है, एक तो इंटीग्रेटेड और दूसरी नॉन इंटीग्रेटेड. सिंचित खेती में उत्पादन अधिक होता है जबकि असिंचित खेती में लागत कम आती है. किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता के अनुसार विधि का चयन कर सकते हैं. दोनों ही स्थितियों में फसल से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. खेत की तैयारी में गहरी जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, सड़ी हुई गोबर खाद या जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है. प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम गोबर खाद डालने से फसल की गुणवत्ता और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं. सीधी बुवाई के लिए प्रति एकड़ लगभग आधा किलो बीज पर्याप्त होता है जबकि ड्रिलिंग विधि में एक से दो किलोग्राम बीज की जरूरत होती है. बीज को 1.5 से 2 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना सबसे उपयुक्त माना जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए मध्य प्रदेश के सतना की कृषि वैज्ञानिक मीनाक्षी वर्मा ने बताया कि अगर बुवाई से पहले और बाद में देखभाल ठीक से की जाए, तो रोगों और कीटों से फसल को बचाया जा सकता है. बुवाई की सही दूरी और नमी नियंत्रण फसल को ब्लाइट जैसी बीमारियों से मुक्त रखता है. मसाला फसलों में खरपतवार उत्पादन को 40 प्रतिशत तक घटा देता है. अजवाइन की खेती में इसे रोकने के लिए समय पर इंटरक्रॉपिंग और हाथ से निराई जरूरी है. यदि समस्या बढ़े तो प्रति हेक्टेयर एक किलोग्राम पेंडिमेथालिन का छिड़काव किया जा सकता है. वैसे अजवाइन एक असिंचित फसल मानी जाती है लेकिन तीन से चार हल्की सिंचाइयां जरूरी हैं. पहली सिंचाई हल्की होनी चाहिए जबकि बाकी सिंचाई शाम को की जाए. प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नाइट्रोजन और 20 किलोग्राम फॉस्फोरस का उपयोग फसल की वृद्धि में सहायक होता है. अजवाइन की लाभ सलेक्शन जैसी जल्दी पकने वाली किस्मों से प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव है. बाजार में अजवाइन की मांग सालभर बनी रहती है और इसका मूल्य मसाला बाजार में स्थिर रहता है. किसानों को उचित देखभाल से प्रति एकड़ हजारों रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है.
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