मूवी रिव्यू : 'पंगा’ लेने की नहीं, देखने की जरूरत है, इमोशनली स्ट्रॉन्ग है कंगना रनोट की फिल्म PangaReview KanganaTeam MovieReview
‘पंगा’ शब्द सुनते ही सबसे पहले मन में लड़ाई-झगड़े की बात आती है। लेकिन जब बात फिल्म ‘पंगा’ की आती है, तब ‘पंगा’ लेने की नहीं, देखने की जरूरत है, क्योंकि अश्विन अय्यर तिवारी निर्देशित यह बड़ी खूबसूरत फिल्म बन पड़ी है। दरअसल, अश्विनी स्टाइल में बनी यह ऐसी फिल्म है, जिसमें इमोशन, वूमन इंपॉवरमेंट और पारिवारिक जद्दोजहद से ऊपर उठकर एक महिला सपने पूरा करने की बात कहती है।फिल्म की कहानी सादी-सिंपल है। कहानी के मुताबिक, भोपाल की जया निगम कबड्डी खेल में अव्वल हैं, जिसके चलते उन्हें रेलवे में नौकरी मिल जाती...
फिल्म के स्ट्रांग पहलू की बात की जाए, तब सही मायने में फिल्म का हीरो बाल कलाकार यज्ञ भासिन है, जिसका अभियन और संवाद अदायगी दर्शकों के दिल को छू जाती है। बालपन और मासूमियत के साथ उसकी डायलॉग डिलवरी और पंचिंग न सिर्फ कहानी को मार्मिक बनाती है, बल्कि दर्शकों को इमोशनल कर देती है। फिल्म में कंगना रनोट के छलकते आंसू से कहीं ज्यादा यज्ञ भसीन और जस्सी गिल के असरदार संवाद दर्शकों को इतना भावुक कर जाते हैं कि पलकें बरबस नम हो जाती हैं। दोनों की अदाकारी कमाल की है। बेशक, नीना गुप्ता, राजेश तैलंग जैसे मझे...
बात जब स्क्रीन प्ले और डायलॉग की आती है, तब इस फिल्म का कोई सानी नहीं है। जब-जब फिल्म में खेल और देशभक्ति की बात कही जाती है, तब-तब ओवर एक्सप्लोर दिखाया जाता रहा है। लेकिन ‘पंगा’ में नेशनल कबड्डी प्रतिस्पर्धा में ऐसा बिल्कुल नहीं है। फिल्म में अगर कमजोर पहलू पर नजर डालें, तब खेल में गहरा रुझान रखने वाले ही कंगना के टीम में सिलेक्शन और खेल में कुछ नियमों पर जरूर खामियां निकाल सकते हैं, लेकिन एक काल्पिनिक मनोरंजक फिल्म होने के नाते इस पर ध्यान देना उचित नहीं होगा। वहीं, फिल्म का नाम ‘पंगा’ तो...
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