पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने के लिए इस्लामाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की सरकार ने जेल में बंद इमरान खान से सालाना बजट पर चर्चा करने की अनुमति मांगी है. सरकार का मानना है कि बजट में इमरान खान का विजन शामिल होना चाहिए.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने के लिए इस्लामाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की सरकार ने जेल में बंद इमरान खान से सालाना बजट पर चर्चा करने की अनुमति मांगी है.
सरकार का मानना है कि बजट में इमरान खान का विजन शामिल होना चाहिए. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सरकार पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई के संस्थापक इमरान खान से मिलना चाहती है. मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जेल में बंद इमरान खान से आगामी सालाना बजट पर चर्चा करने के लिए अनुमति मांगी है.
सरकार का मानना है कि इमरान खान के साथ सलाह करना जरूरी है. वो चाहते हैं कि प्रांतीय बजट में इमरान खान का विजन पूरी तरह से दिखाई दे. सरकार ने जनता की जरूरतों और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए एक संतुलित और जन-हितैषी बजट तैयार किया है. ये बजट मेरिट को बढ़ावा देकर और युवाओं को बेहतर मौके देकर पीटीआई संस्थापक इमरान खान के सपनों को साकार करेगा.
सरकार ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पिछले साल अक्टूबर में सीएम पद संभाला था. इसके बाद से वो 15 से ज्यादा बार रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद इमरान खान से मिलने की कोशिशें कर चुके हैं. इसके बावजूद, हर बार उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी गई. हैरानी की बात ये है कि अदालत के आदेशों के बावजूद, केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री को इमरान खान से मिलने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया.
इस पाबंदी के खिलाफ पीटीआई के नेताओं ने जेल के बाहर कई दिनों तक लगातार कई विरोध प्रदर्शन भी किए, लेकिन उनकी सारी कोशिशें बेकार गईं. इस बार मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इमरान खान की बहन अलीमा खान के निर्देशों पर एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने प्रांतीय विधानसभा में सालाना बजट को पास कराने की शर्त को इमरान खान के साथ होने वाली मुलाकात से जोड़ दिया है.
यानी जब तक मुख्यमंत्री की मुलाकात इमरान खान से नहीं होगी, तब तक बजट पास नहीं कराया जाएगा. एक संवैधानिक विशेषज्ञ के मुताबिक, सरकार का ये कदम मुश्किलों का पिटारा खोल सकता है. अगर किसी वजह से केपीके सरकार 30 जून तक अपना सालाना बजट पास नहीं करा पाती है, तो प्रांत में एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है
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