कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने नागपुर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी करने वाली एक छात्रा की कथित आत्महत्या की घटना को लेकर गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा।
पिता जो कर सकता था, उसने सब किया, नीट पेपर लीक हुआ, और आकांक्षा छोड़कर चली गई; राहुल गांधी बोले- न सुधार, न न्यायकांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने नागपुर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी करने वाली एक छात्रा की कथित आत्महत्या की घटना को लेकर गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा।कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने नागपुर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी करने वाली एक छात्रा की कथित आत्महत्या की घटना को लेकर गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी की कीमत पूरी एक युवा पीढ़ी चुका रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया कि 'छात्रा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि मोदी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है।’ राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया। नागपुर में खुद रसोइये की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहां कोचिंग कर सके।' राहुल गांधी ने कहा, 'एक पिता जो कर सकता था, उसने सब किया। फिर नीट पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़कर चली गई।'लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'और धर्मेंद्र प्रधान जी?
आज भी कुर्सी पर हैं। फिर वही समिति। वही तबादला। वही जांच। न सुधार, न न्याय।' मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती, आती-जाती रहती है। लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की NEET की तैयारी कर रही छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने कथित तौर पर नागपुर में आत्महत्या कर ली। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की खबरों के बाद वह डिप्रेशन में चली गई थी। 18 साल की यह छात्रा, जो नागपुर के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट' की तैयारी कर रही थी, 20 मई को अपने कमरे में फंदे से लटकी मिली। कुछ दिनों बाद, परिवार को उसका हाथ से लिखा एक नोट मिला, जिससे पता चला कि डिप्रेशन में चली गई थी।आकांक्षा ने उस नोट में लिखा, "मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि आपकी बेटी खूब पढ़ाई करेगी और डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब मुझमें दोबारा NEET परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है।" उसने लिखा, "पहले प्रयास में मेरे अच्छे नंबर आ रहे थे, लेकिन अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मैं दोबारा अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगी। मुझे माफ कर देना, मम्मी-पापा। मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।"आकांक्षा मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी। उसके पिता, कृष्ण कुमार चौबे, एक छोटे किसान हैं। परिवार वालों के मुताबिक, उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए काफ़ी आर्थिक जोखिम उठाए थे। खेती-बाड़ी के अलावा, वह घर का खर्च और कोचिंग की फीस जुटाने के लिए नागपुर में रसोइए का काम भी करते थे। रिश्तेदारों ने बताया कि आकांक्षा की तैयारी का खर्च उठाने के लिए परिवार ने 'किसान क्रेडिट कार्ड' से करीब 3 लाख रुपये का लोन लिया था और रिश्तेदारों से भी आर्थिक मदद ली थी।वरुण शैलेश, नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और होमपेज टीम का हिस्सा बने। वह शिफ्ट और होमपेज की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ न्यूज की प्रभावी प्लानिंग, खबर लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल न्यूज टीम में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान डेस्क के साथ रिपोर्टिंग का अनुभव भी हासिल किया। सियासी गलियारे में होने वाली हलचलों, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों, समाज में सांस्कृतिक बदलावों पर नजर रखते हैं। करंट अफेयर्स को लेकर सचेत रहने वाले वरुण शैलेश रोजाना खबरों को विभिन्न एंगल से प्रस्तुत करने को लेकर एक्टिव रहते हैं। वैश्विक राजनीति का देश की सियासत पर पड़ने वाले असर, जियोपॉलिटिकल सिचुएशन के लिहाज से खबरों के प्रजेंटेशन में महारत रखते हैं। वरुण शैलेश न्यूज को चैलेंज की तरह लेते हैं और खबरों की दुनिया को एन्जॉय करते हैं। विशेषज्ञताः करंट अफेयर्स, ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक खबरों के साथ ग्लोबल पॉलिटकल सिचुएशन का देश की राजनीति पर पड़ने वाले असर के लिहाज से खबरों को प्रस्तुत करते हैं। सोशल जस्टिस, चाइल्ड प्रोटेक्शन से जुड़े इश्यूज पर पकड़। पत्रकारिता का अनुभवः वरुण शैलेश ने वर्ष 2009 में इंडो एशियन न्यूज सर्विस से करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग और खबरों के संपादन में महारत हासिल की। इसके बाद हिन्दुस्तान से जुड़े और सेंट्रल डेस्क पर पांच साल से ज्यादा समय तक रहे। इस दौरान, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरों के संपादन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दैनिक जागरण के संपादकीय पेज और Op-ed पेज पर रहे। इस दौरान विभिन्न विषयों के नामचीन लेखकों, वरिष्ठ पत्रकारों के लेखों के संपादन के साथ साथ आइडिएशन, संपादन की जिम्मेदारी संभाली। 2018 में आजतक टीम का हिस्सा बने। आजतक में मुख्य न्यूज टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान लोकसभा चुनाव 2019, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनावों को कवर किया। दिल्ली में विभिन्न पॉलिटकल गतिवियों को कवर किया। आजतक में इंटरनेशनल-फीचर टीम को भी लीड किया। आजतक डिजिटल में इंटरनेशनल पेज को दूसरा सबसे अधिक नंबर लाने वाले सेक्शन के तौर पर स्थापित किया। दैनिक भास्कर में वुमन सेक्शन टीम को लीड किया। इस दौरान आइडिएशन, प्रभावी प्लानिंग की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ हेल्थ, क्राइम, फूड और सोशल इश्यूज पर जमकर लिखा। वरुण शैलेश ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की डिग्री भी हासिल की।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद
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