केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें विभाजनकारी और भारत विरोधी बताया। उन्होंने आगामी चुनावों में अन्नाद्रमुक महासचिव ए. के. के साथ गठबंधन की संभावना पर भी बात की।
एएनआई, चेन्नई। केंद्रीय मंत्री और तमिलनाडु भाजपा के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्टालिन को ''विभाजनकारी'' और ''भारत विरोधी'' करार देते हुए दावा किया कि आगामी चुनाव ों में अन्नाद्रमुक महासचिव ए.
पलानीस्वामी के नेतृत्व में राजग को शानदार जीत मिलेगी। चेन्नई में मीडिया से बात करते हुए गोयल ने स्टालिन के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें मुख्यमंत्री ने 'परिसीमन' को प्रगतिशील राज्यों को सजा देने की कोशिश बताया था। गोयल ने कहा कि स्टालिन भारत को एक देश के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और उनके बयान देश की एकता के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन परिवार न केवल भारत विरोधी है, बल्कि खुद को तमिलनाडु का हितैषी बताकर राज्य के लोगों को गुमराह कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस और द्रमुक पर महिला आरक्षण विधेयक में बाधा डालने और महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''गांधी परिवार, बनर्जी परिवार और स्टालिन परिवार ने भारतीय महिलाओं को उनके राजनैतिक अधिकार से वंचित रखा है। प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि 2029 तक महिलाओं को उनका हक मिले, लेकिन विपक्ष दक्षिणी राज्यों के हितों का डर दिखाकर इसमें अड़ंगा लगा रहा है।'' गोयल ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार सीटों के आनुपातिक वितरण पर काम कर रही है ताकि तमिलनाडु जैसे राज्यों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने सवाल किया कि स्टालिन दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को लेकर भ्रामक स्थिति क्यों पैदा कर रहे हैं। विकास एवं हितों से खिलवाड़ करने वालों के लिए मैं खतरा हूं: स्टालिन प्रेट्र के अनुसार, मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र पर तमिलनाडु के हितों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि वे राज्य की प्रगति रोकने वालों के लिए ''खतरा'' साबित होंगे। उन्होंने परिसीमन को बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए सजा बताया। स्टालिन ने सामाजिक न्याय के साथ विकास को अपना मुख्य लक्ष्य बताते हुए तमिल हितों की रक्षा का संकल्प दोहराया। वकील की दलील-पवन खेड़ा को गिरफ्तारी का कोई खतरा नहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के वकील ने गौहाटी हाई कोर्ट में दलील दी है कि खेड़ा को गिरफ्तारी का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता भी नहीं है। पवन खेड़ा के पास कई पासपोर्ट होने के आरोप के मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा की ओर से दर्ज की गई एफआइआर से संबंधित है। जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने तीन घंटे से अधिक समय तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया। वीडियो कान्फ्रेंसिंग से खेड़ा के लिए उपस्थित हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क किया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा द्वारा कांग्रेस नेता के आरोपों के जवाब में किए गए बयान राजनीतिक प्रतिशोध को दर्शाते हैं, विशेषकर राज्य में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में। असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को कोई राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि यह एक साधारण मानहानि का मामला नहीं है, क्योंकि इसमें दस्तावेजों और शीर्षक पत्रों की जालसाजी शामिल है।
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