West Bengal Malda Family Murder Case Explained; Follow Mrityudand True Crime Story, Real Murder Cases, News and Updates On Dainik Bhaskar.
पांच ताबूत बनाए, बेहोश मां-बाप, भाई-बहन को डालकर पानी भरा; फैमिली किलर पार्ट-1पश्चिम बंगाल के मालदा सिटी से 25 किलोमीटर दूर 16 माइल गांव। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। तारीख थी- 28 फरवरी, 2021। 19 साल का एक दुबला-पतला लड़का, दो मंजिला गोदाम में बैठकर धारदार आरी से प्लाईवुड काट रहा था। लड़के का नाम था आसिफ। उसने तेज आवाज में गाने भ‘आसिफ, सुबह-सुबह आरी क्यों चला रहा है। इतनी तेज आवाज में गाने क्यों बजा रहा है?’‘कितनी बार कहा है मेरे काम के बीच में कुछ मत बोला करो। मेरा कंसंट्रेशन बिगड़ जाता है। मैं अभी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हूं। तुम लोग भी अमेरिका जाने की तैयारी करो। फटाफट पैकिंग करो। मुझे डिस्टर्ब मत करो।’‘इसमें पानी कैसे भरूंगा?’‘चलो एक प्रोजेक्ट तो पूरा हो गया। अब दूसरे की बारी।’ आसिफ गोदाम से घर की ओर चल दिया। गोदाम में केवल दो दरवाजे थे एक मेन गेट और छोटा गेट। इसी छोटे गेट से आसिफ के घर का रास्ता जाता था।‘चलो खाना खा लो। अब्बू भी आ चुके हैं खेत से।’कहते हुए आसिफ फ्रिज से जूस की बॉटल निकालकर अपने कमरे में ले गया। फिर टेबल से दवा की एक स्ट्रिप उठाई और 15-20 टैबलेट निकालकर जूस की बॉटल में डाल दीं।‘जूस को कुछ देर और फ्रिज में रख देता हूं, अभी ज्यादा ठंडा नहीं है।’ आसिफ के अब्बू जावेद अली, अम्मी ईरा बीबी, बड़ा भाई आरिफ, छोटी बहन आरिफा खातून और दादी अलेक्जन डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने लगे। खाना खत्म होने के तुरंत बाद आसिफ बोला-, कहते हुए आसिफ ने 6 गिलास निकाले और सभी में जूस भर दिया। खुद जूस का गिलास लेकर गोदाम की तरफ जाते हुए बोला-गोदाम पहुंचकर आसिफ ने जूस का गिलास किनारे रख दिया। फिर लैपटॉप में इंग्लिश मूवी देखने लगा। उधर, जूस पीने के कुछ देर बाद ही सभी का सिर चकराने लगा। एक-एक करके सभी के मुंह से झाग निकलने लगा और सभी बेहोश होने लगे। कुछ ही देर में हॉल में सन्नाटा पसर गया। हर कोई शांत हो गया। माहौल को भांपकर आसिफ भागता हुआ अपने डाइनिंग हॉल की तरफ आया। उसने जैसे ही दरवाजे को धक्का दिया, तो देखा- सभी लाशों की तरह कुर्सियों पर पड़े थे, लेकिन उनकी सांसें चल रहीं थीं।ये देखकर आसिफ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। वो धीरे-धीरे सबसे पहले अपने अब्बू के पास पहुंचा। उनके दोनों बेजान हाथ लटके हुए थे। मुंह से झाग निकल रहा था। आसिफ झुका और धीरे से उनके कान में बुदबुदाया-ये कहते ही वो वापस अपने गोदाम की ओर चल दिया। गोदाम के एक कोने में करीने से पांच ताबूत रखे हुए थे। आसिफ ने सभी के ढक्कन हटाकर किनारे रखे और डाइनिंग हॉल की तरफ लौट आया। कुछ सोचते हुए नाक-भौंह सिकोड़कर बोला-आसिफ ने कंधे के सहारे अब्बू के दोनों हाथ कसकर पकड़े और घसीटकर गोदाम ले जाने लगा। कुछ देर बाद वह हांफने लगा। रुककर थोड़ा सुस्ताया, फिर अब्बू को घसीटने लगा। गोदाम पहुंचते ही उसने ताबूत के करीब जमीन पर अब्बू को पटक दिया।‘ताबूत में पानी भी तो भरना है। ऐसे तो पूरा पानी बह जाएगा। इसमें पॉलिथीन लगानी पड़ेगी।’ आसिफ फौरन घर के ऊपर वाले कमरे की ओर भागा और एक पॉलिथीन का बंडल ले आया। पांचों ताबूत के साइज के हिसाब से काटकर सभी में बिछा दी। फिर पूरी ताकत से अब्बू को उठाया और ताबूत के अंदर पटक दिया। अब्बू के शरीर में कोई हलचल तो नहीं थी, लेकिन मुंह से झाग अभी भी निकल रहा था।‘कहीं बीच में ही होश आ गया तो… मुंह पर भी टेप चिपका देता हूं।’ टेप चिपकाने के बाद उसने इधर-उधर देखा और एक हथौड़ा लेकर आया। ताबूत का ढक्कन लगाया और चारों तरफ से कील ठोंककर पैक कर दिया। ढक्कन में एक छेद था, आसिफ उसी से ताबूत में पानी भरने लगा। उधर, अभी भी डाइनिंग हॉल में बाकी लोग बेजान पड़े थे। कुछ देर बाद आसिफ वापस आया और अम्मी ईरा बीवी के दोनों पैर पकड़कर खींचते हुए गोदाम में ले जाने लगा। अम्मी को जमीन पर पटककर बुदबुदाया-एक ताबूत खींचकर लाया और अब्बू के ताबूत के बगल में रख दिया। अम्मी को इसमें डालकर हाथ-पैर टेप से बांध दिए और मुंह पर भी टेप चिपका दिया। ताबूत का ढक्कन लगाया और इसमें भी पानी भर दिया। फिर भागता हुआ वापस डाइनिंग हॉल में आया। 15 साल की बहन आरिफा खातून कुर्सी के नीचे अधमरी पड़ी थी। आसिफ ने उसे उठाया और चेहरा देखते हुए बोला-दोनों हाथ पकड़कर उसे भी घसीटते हुए गोदाम में ले आया।फिर तीसरा ताबूत भी अब्बू-अम्मी के ठीक बगल में रख दिया। आरिफा को ताबूत में डालकर हाथ-पैर में टेप लपेटा और ढक्कन लगा दिया। कील ठोंककर इसमें भी पानी भर दिया। अब तक आसिफ पसीना-पसीना हो चुका था। जहां ताबूत रखे थे, वहीं एक कोने में बैठकर सुस्ताने लगा। कुछ देर बाद उठा और बोला-आसिफ डाइनिंग हॉल में दादी की कुर्सी के पास पहुंचा। पूरी ताकत के साथ उन्हें उठाया, लेकिन वजन ज्यादा था, इसलिए दादी कुर्सी से हिली भी नहीं। आसिफ को गुस्सा आ गया। वो फौरन रस्सी लेकर आया और दादी के दोनों पैरों में बांध दी। फिर रस्सी के सहारे खींचते हुए गोदाम ले गया। इस बार आसिफ को काफी ज्यादा समय लगा। अब उसने दादी को भी ठीक उसी तरह ताबूत में डालकर पैक कर दिया जैसे बाकी तीनों को किया था। इसमें भी पानी भर दिया। फिर दांत पीसते हुए बोला-अब आसिफ अपने भाई को लेने वापस डाइनिंग हॉल पहुंचा। फ्रिज से पानी की बॉटल निकाली और आरिफ के पास ही कुर्सी पर बैठकर पानी पीने लगा। फिर उसके कानों में धीरे से बोला- ‘अब्बू मेरी बात नहीं मान रहे थे, तो तू समझाता न उनको। बड़ा भाई इतना तो कर ही सकता है अपने छोटे भाई के लिए, लेकिन तूने कुछ नहीं किया।’ पानी पीने के बाद आसिफ ने आरिफ को भी घसीटना शुरू किया। इसे भी गोदाम ले जाकर ताबूत में पटक दिया। उसके साथ भी बाकियों जैसा सुलूक किया। घंटों तक आसिफ वहां बैठे पांचों ताबूतों में पानी का लेवल देखता रहा। जिसमें भी पानी कम होता, आसिफ फौरन पाइप लगा देता।ऐसा करते-करते शाम के सात बज चुके थे। आसिफ ने टॉर्च जलाकर देखा, तो ताबूत के भीतर कोई हलचल नहीं थी। अब उसे यकीन हो चुका था कि ताबूत में लेटे पांचों लोग मर चुके हैं। वो आराम से एक कोने में आकर सुस्ताने लगा। तभी एक ताबूत के भीतर कुछ हलचल हुई। वह फौरन भागकर अपने कमरे से पिस्टल लेकर आया और उस ताबूत को निशाना बनाकर तान लिया… जब सभी की मौत हो गई थी, फिर एक ताबूत में अचानक हलचल क्यों होने लगी? इस ताबूत में कौन था? वह जिंदा बच गया या आसिफ ने गोली मार दी? आखिर आसिफ ने पूरी फैमिली को मारने का प्लान क्यों बनाया? ताबूत में पानी भरकर सभी को डूबोने का प्लान कैसे बनाया? वह अपनी अम्मी से अमेरिका जाने की बात क्यों कह रहा था?कुछ देर तक पिस्टल ताने आसिफ इंतजार करता रहा। फिर उसने धीरे से ताबूत का ढक्कन हटाया। आरिफ तुरंत उठ खड़ा हुआ। आसिफ ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तान दी। आरिफ सकपका गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। आसिफ ने तुरंत उसकी गर्दन पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया। आरिफ हट्टा-कट्टा था, उसने आसिफ के दोनों पैर पकड़कर जमीन पर पटक दिया।पूरे प्रदेश में होगी बारिशराजस्थान के 29 जिलों में आज बारिश का अलर्टयमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज में फंसी सात भैंस, पांच मरीआगरा की सड़क पर दौड़ा करंट, VIDEO.
पांच ताबूत बनाए, बेहोश मां-बाप, भाई-बहन को डालकर पानी भरा; फैमिली किलर पार्ट-1पश्चिम बंगाल के मालदा सिटी से 25 किलोमीटर दूर 16 माइल गांव। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। तारीख थी- 28 फरवरी, 2021। 19 साल का एक दुबला-पतला लड़का, दो मंजिला गोदाम में बैठकर धारदार आरी से प्लाईवुड काट रहा था। लड़के का नाम था आसिफ। उसने तेज आवाज में गाने भ‘आसिफ, सुबह-सुबह आरी क्यों चला रहा है। इतनी तेज आवाज में गाने क्यों बजा रहा है?’‘कितनी बार कहा है मेरे काम के बीच में कुछ मत बोला करो। मेरा कंसंट्रेशन बिगड़ जाता है। मैं अभी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हूं। तुम लोग भी अमेरिका जाने की तैयारी करो। फटाफट पैकिंग करो। मुझे डिस्टर्ब मत करो।’‘इसमें पानी कैसे भरूंगा?’‘चलो एक प्रोजेक्ट तो पूरा हो गया। अब दूसरे की बारी।’ आसिफ गोदाम से घर की ओर चल दिया। गोदाम में केवल दो दरवाजे थे एक मेन गेट और छोटा गेट। इसी छोटे गेट से आसिफ के घर का रास्ता जाता था।‘चलो खाना खा लो। अब्बू भी आ चुके हैं खेत से।’कहते हुए आसिफ फ्रिज से जूस की बॉटल निकालकर अपने कमरे में ले गया। फिर टेबल से दवा की एक स्ट्रिप उठाई और 15-20 टैबलेट निकालकर जूस की बॉटल में डाल दीं।‘जूस को कुछ देर और फ्रिज में रख देता हूं, अभी ज्यादा ठंडा नहीं है।’ आसिफ के अब्बू जावेद अली, अम्मी ईरा बीबी, बड़ा भाई आरिफ, छोटी बहन आरिफा खातून और दादी अलेक्जन डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने लगे। खाना खत्म होने के तुरंत बाद आसिफ बोला-, कहते हुए आसिफ ने 6 गिलास निकाले और सभी में जूस भर दिया। खुद जूस का गिलास लेकर गोदाम की तरफ जाते हुए बोला-गोदाम पहुंचकर आसिफ ने जूस का गिलास किनारे रख दिया। फिर लैपटॉप में इंग्लिश मूवी देखने लगा। उधर, जूस पीने के कुछ देर बाद ही सभी का सिर चकराने लगा। एक-एक करके सभी के मुंह से झाग निकलने लगा और सभी बेहोश होने लगे। कुछ ही देर में हॉल में सन्नाटा पसर गया। हर कोई शांत हो गया। माहौल को भांपकर आसिफ भागता हुआ अपने डाइनिंग हॉल की तरफ आया। उसने जैसे ही दरवाजे को धक्का दिया, तो देखा- सभी लाशों की तरह कुर्सियों पर पड़े थे, लेकिन उनकी सांसें चल रहीं थीं।ये देखकर आसिफ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। वो धीरे-धीरे सबसे पहले अपने अब्बू के पास पहुंचा। उनके दोनों बेजान हाथ लटके हुए थे। मुंह से झाग निकल रहा था। आसिफ झुका और धीरे से उनके कान में बुदबुदाया-ये कहते ही वो वापस अपने गोदाम की ओर चल दिया। गोदाम के एक कोने में करीने से पांच ताबूत रखे हुए थे। आसिफ ने सभी के ढक्कन हटाकर किनारे रखे और डाइनिंग हॉल की तरफ लौट आया। कुछ सोचते हुए नाक-भौंह सिकोड़कर बोला-आसिफ ने कंधे के सहारे अब्बू के दोनों हाथ कसकर पकड़े और घसीटकर गोदाम ले जाने लगा। कुछ देर बाद वह हांफने लगा। रुककर थोड़ा सुस्ताया, फिर अब्बू को घसीटने लगा। गोदाम पहुंचते ही उसने ताबूत के करीब जमीन पर अब्बू को पटक दिया।‘ताबूत में पानी भी तो भरना है। ऐसे तो पूरा पानी बह जाएगा। इसमें पॉलिथीन लगानी पड़ेगी।’ आसिफ फौरन घर के ऊपर वाले कमरे की ओर भागा और एक पॉलिथीन का बंडल ले आया। पांचों ताबूत के साइज के हिसाब से काटकर सभी में बिछा दी। फिर पूरी ताकत से अब्बू को उठाया और ताबूत के अंदर पटक दिया। अब्बू के शरीर में कोई हलचल तो नहीं थी, लेकिन मुंह से झाग अभी भी निकल रहा था।‘कहीं बीच में ही होश आ गया तो… मुंह पर भी टेप चिपका देता हूं।’ टेप चिपकाने के बाद उसने इधर-उधर देखा और एक हथौड़ा लेकर आया। ताबूत का ढक्कन लगाया और चारों तरफ से कील ठोंककर पैक कर दिया। ढक्कन में एक छेद था, आसिफ उसी से ताबूत में पानी भरने लगा। उधर, अभी भी डाइनिंग हॉल में बाकी लोग बेजान पड़े थे। कुछ देर बाद आसिफ वापस आया और अम्मी ईरा बीवी के दोनों पैर पकड़कर खींचते हुए गोदाम में ले जाने लगा। अम्मी को जमीन पर पटककर बुदबुदाया-एक ताबूत खींचकर लाया और अब्बू के ताबूत के बगल में रख दिया। अम्मी को इसमें डालकर हाथ-पैर टेप से बांध दिए और मुंह पर भी टेप चिपका दिया। ताबूत का ढक्कन लगाया और इसमें भी पानी भर दिया। फिर भागता हुआ वापस डाइनिंग हॉल में आया। 15 साल की बहन आरिफा खातून कुर्सी के नीचे अधमरी पड़ी थी। आसिफ ने उसे उठाया और चेहरा देखते हुए बोला-दोनों हाथ पकड़कर उसे भी घसीटते हुए गोदाम में ले आया।फिर तीसरा ताबूत भी अब्बू-अम्मी के ठीक बगल में रख दिया। आरिफा को ताबूत में डालकर हाथ-पैर में टेप लपेटा और ढक्कन लगा दिया। कील ठोंककर इसमें भी पानी भर दिया। अब तक आसिफ पसीना-पसीना हो चुका था। जहां ताबूत रखे थे, वहीं एक कोने में बैठकर सुस्ताने लगा। कुछ देर बाद उठा और बोला-आसिफ डाइनिंग हॉल में दादी की कुर्सी के पास पहुंचा। पूरी ताकत के साथ उन्हें उठाया, लेकिन वजन ज्यादा था, इसलिए दादी कुर्सी से हिली भी नहीं। आसिफ को गुस्सा आ गया। वो फौरन रस्सी लेकर आया और दादी के दोनों पैरों में बांध दी। फिर रस्सी के सहारे खींचते हुए गोदाम ले गया। इस बार आसिफ को काफी ज्यादा समय लगा। अब उसने दादी को भी ठीक उसी तरह ताबूत में डालकर पैक कर दिया जैसे बाकी तीनों को किया था। इसमें भी पानी भर दिया। फिर दांत पीसते हुए बोला-अब आसिफ अपने भाई को लेने वापस डाइनिंग हॉल पहुंचा। फ्रिज से पानी की बॉटल निकाली और आरिफ के पास ही कुर्सी पर बैठकर पानी पीने लगा। फिर उसके कानों में धीरे से बोला- ‘अब्बू मेरी बात नहीं मान रहे थे, तो तू समझाता न उनको। बड़ा भाई इतना तो कर ही सकता है अपने छोटे भाई के लिए, लेकिन तूने कुछ नहीं किया।’ पानी पीने के बाद आसिफ ने आरिफ को भी घसीटना शुरू किया। इसे भी गोदाम ले जाकर ताबूत में पटक दिया। उसके साथ भी बाकियों जैसा सुलूक किया। घंटों तक आसिफ वहां बैठे पांचों ताबूतों में पानी का लेवल देखता रहा। जिसमें भी पानी कम होता, आसिफ फौरन पाइप लगा देता।ऐसा करते-करते शाम के सात बज चुके थे। आसिफ ने टॉर्च जलाकर देखा, तो ताबूत के भीतर कोई हलचल नहीं थी। अब उसे यकीन हो चुका था कि ताबूत में लेटे पांचों लोग मर चुके हैं। वो आराम से एक कोने में आकर सुस्ताने लगा। तभी एक ताबूत के भीतर कुछ हलचल हुई। वह फौरन भागकर अपने कमरे से पिस्टल लेकर आया और उस ताबूत को निशाना बनाकर तान लिया… जब सभी की मौत हो गई थी, फिर एक ताबूत में अचानक हलचल क्यों होने लगी? इस ताबूत में कौन था? वह जिंदा बच गया या आसिफ ने गोली मार दी? आखिर आसिफ ने पूरी फैमिली को मारने का प्लान क्यों बनाया? ताबूत में पानी भरकर सभी को डूबोने का प्लान कैसे बनाया? वह अपनी अम्मी से अमेरिका जाने की बात क्यों कह रहा था?कुछ देर तक पिस्टल ताने आसिफ इंतजार करता रहा। फिर उसने धीरे से ताबूत का ढक्कन हटाया। आरिफ तुरंत उठ खड़ा हुआ। आसिफ ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तान दी। आरिफ सकपका गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। आसिफ ने तुरंत उसकी गर्दन पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया। आरिफ हट्टा-कट्टा था, उसने आसिफ के दोनों पैर पकड़कर जमीन पर पटक दिया।पूरे प्रदेश में होगी बारिशराजस्थान के 29 जिलों में आज बारिश का अलर्टयमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज में फंसी सात भैंस, पांच मरीआगरा की सड़क पर दौड़ा करंट, VIDEO
Rarest Of Rare Case West Bengal Malda City Malda Family Killer Asif Ira Bibi Malda Family Murder Case
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