भारत ने ऐतिहासिक रूप से फलस्तीन को लेकर आधिकारिक समर्थन जताया है। भारत दो राष्ट्रों के समाधान का समर्थन करता है, जिसमें सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र फलस्तीन राज्य की स्थापना शामिल है। भारत संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की सदस्यता का भी समर्थन करता है और पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति और गाजा में मानवीय संकट को लेकर चिंतित है।
फलस्तीन पर क्या रहा है भारत का आधिकारिक पक्ष? भारत ने ऐतिहासिक तौर पर फलस्तीन को लेकर आधिकारिक तौर पर समर्थन जताया है। फिर चाहे भारत की आजादी के बाद पहली सरकार की तरफ से रखा गया पक्ष हो या नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से बार-बार अलग-अलग मंचों पर दिए जा रहे जवाब। भारत ने इस्राइल और फलस्तीन के मुद्दे पर हमेशा से टू स्टेट सॉल्यूशन यानी 'दो राष्ट्रों के समाधान' का समर्थन किया है। इसके तहत भारत सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलिस्तीन राज्य...
भाजपा और उसके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार यह मोदी सरकार ही है, जिसने अपने कार्यकाल में फलस्तीन के साथ-साथ इस्राइल के साथ भी रिश्ते प्रगाढ़ किए हैं। 2020 में नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो कि सिर्फ इस्राइल के दौरे पर गए थे, जबकि इससे पहले के सभी प्रधानमंत्री बिना फलस्तीन जाए इस्राइल का दौरा नहीं करते थे। माना जाता है कि मोदी का यह कदम उनकी पार्टी भाजपा के बदलते रुख को भी दर्शाता है, जो कि इस्राइल के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने का समर्थक रहा है। हालांकि, भाजपा और उसके नेतृत्व...
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