भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के प्रभाव के कारण उत्तर और मध्य भारत में भीषण सूखे और दक्षिण भारत में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। मानसून 26 मई तक केरल पहुंच सकता है।
भारतीय मौसम विभाग ने आगामी मानसून सत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है जिसके अनुसार इस वर्ष देश के मौसम में काफी विरोधाभासी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून इस बार अपनी सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले यानी 26 मई के आसपास केरल के तटों पर दस्तक दे सकता है। जहां एक ओर दक्षिण भारत के तटीय राज्यों में भारी बारिश और भीषण बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के विस्तृत इलाकों में भीषण सूखे की आशंका जताई गई है। इस प्रतिकूल स्थिति का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो प्रभाव है जो भारतीय मानसून की लय को बिगाड़ सकता है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है जिसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है और भारत के लिए यह ऐतिहासिक रूप से हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। जब अल नीनो मजबूत होता है तो यह दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की मात्रा सामान्य से काफी कम हो जाती है। इस बार अल नीनो के तेजी से आकार लेने के कारण उत्तर और मध्य भारत के कृषि प्रधान राज्यों जैसे पंजाब हरियाणा राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्र देश में बारिश की भारी कमी हो सकती है। इसके विपरीत तमिलनाडु और आंध्र प्र देश जैसे तटीय राज्यों में अत्यधिक वर्षा के कारण तबाही वाली बाढ़ आने की संभावना है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए मानसून की यह अनिश्चितता अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि देश की आधी से अधिक आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है और भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी हिस्सा इसी मानसून सत्र से प्राप्त होता है। आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मानसून ी बारिश में कमी का सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों और ग्रामीण आय पर पड़ेगा। यदि प्रमुख फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिला तो उत्पादन घटेगा जिससे महंगाई बढ़ सकती है और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों पर भी दबाव महसूस किया जा सकता है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल मानसून ी बारिश दीर्घकालिक औसत के केवल 92 फीसदी रहने की संभावना है जो सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35 प्रतिशत है जो कि सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। जून और जुलाई के महीनों में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है जिससे सूखे का संकट और गहरा सकता है। हालांकि इस गंभीर स्थिति के बीच इंडियन ओशन डिपोल जिसे आईओडी कहा जाता है एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। जलवायु मॉडलों के अनुसार मानसून के अंतिम महीनों में आईओडी सकारात्मक हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है और मानसून ी हवाओं को नई मजबूती प्रदान कर सकता है जिससे कुछ प्रभावित इलाकों में बारिश की वापसी संभव हो पाएगी। इसके साथ ही मौसम विभाग अपने विशेषज्ञों के माध्यम से लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करने जा रहा है क्योंकि वर्तमान मापदंड भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाते हैं। वर्तमान में उत्तर प्र देश समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्र देश के विभिन्न शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। बांदा में अधिकतम तापमान 44.
8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि झांसी में 44.1 डिग्री और प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी पहुंची है। आगरा और गाजीपुर जैसे शहरों में भी तापमान 42 से 43 डिग्री के बीच रहा है। इस भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम विभाग ने पहली बार कर्नाटक और महाराष्ट्र तट के पास बने एक विशेष चक्रवाती तंत्र के आधार पर पूर्वानुमान जारी किए हैं जो कि एक नई और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया रही है क्योंकि इससे पहले दक्षिण में इतनी करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था। कुल मिलाकर इस वर्ष का मानसून अनिश्चितताओं से भरा है और देश को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है
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