फ्रांस शुरू में राफेल फाइटर जेट बेचने में हिचकिचा रहा था। वहीं राफेल फाइटर जेट को ग्राहक खोजने में भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन जैसे ही भारत ने इंडियन एयरफोर्स के लिए राफेल खरीदा, फ्रांस की किस्मत बदल गई। अब करीब दर्जन भर देश राफेल फाइटर जेट का ऑर्डर दे चुके...
पेरिस: फ्रांस रॉकेट की रफ्तार से राफेल फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन करता है। अमेरिका के बाद फ्रांस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार बेचने वाला देश बन गया है। अपने डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए फ्रांस ने अपने स्टारफाइटर जेट-डसॉल्ट राफेल के उत्पादन को काफी तेजी से बढ़ा दिया है। इसके अलावा फ्रांस की कोशिश अपने भागीदरों को ज्यादा से ज्यादा राफेल फाइटर जेट बेचने की है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस को पीछे छोड़कर फ्रांस दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन गया है। साल 2014-18 और 2019-23 के बीच फ्रांसीसी हथियारों की बिक्री में 47% का इजाफा देखने को मिला है।SIPRI की रिपोर्ट में कहा गया है फ्रांस ने अपने सबसे ज्यादा हथियार एशिया और ओशिनिया राज्यों को बेचे हैं, जबकि 34 प्रतिशत मध्य पूर्वी राज्यों को बेचे हैं। फ्रांस ने सबसे ज्यादा हथियार भारत को बेचे हैं, जो लगभग उसके कुल निर्यात का 30 प्रतिशत हिस्सा है। SIPRI की शोधकर्ता कैटरीना जोकिक ने कहा कि 'फ्रांस निर्यात के माध्यम से अपने हथियार इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए मजबूत वैश्विक मांग का फायदा उठा रहा है।' उन्होंने कहा कि 'फ्रांस यूरोप के बाहर अपने लड़ाकू विमानों को बेचने में काफी कामयाब रहा है।'राफेल फाइटर जेट के निर्यात में जबरदस्त उछालएशिया में फ्रांस ने भारत, मिस्र और कतर जैसे देशों को भारी संख्या में राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की है। डसॉल्ट राफेल कई देशों के लिए पसंदीदा लड़ाकू विमान बन गया है। फ्रांसीसी एयरफोर्स और स्पेस फोर्स के अलावा राफेल को मिस्र, भारत, कतर, यूएई, ग्रीस, क्रोएशिया, इंडोनेशिया और सर्बिया सहित आठ देशों की वायु सेनाओं ने खरीदा है। इनमें से, यूएई ने 2021 में 80 लड़ाकू विमानों का सबसे बड़ा ऑर्डर दिया है। बिक्री में उछाल ने प्रोडक्शन को लगातार बनाए रखा है। डसॉल्ट एविएशन ने राफेल की अपनी पूरे साल की बिक्री में इजाफे की रिपोर्ट दी है। यह इजाफा भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की वजह से है।डसॉल्ट एविएशन ने कहा है कि उसे मांग में उछाल का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य वजह यूक्रेन युद्ध और यूरोपीय संघ की सुरक्षा चिंताए हैं। डसॉल्ट ने कहा है कि उसे 2025 में 25 राफेल और 40 फाल्कन विमान देने की उम्मीद है, जिससे सालाना लगभग 6.
5 बिलियन यूरो का राजस्व हासिल होगा। पिछले साल, डसॉल्ट ने 10.87 बिलियन यूरो के ऑर्डर प्राप्त करने की सूचना दी थी, जिसमें 26 फाल्कन बिजनेस जेट और 30 राफेल युद्धक विमानों के लिए पहले से घोषित ऑर्डर शामिल थे। इसके अलावा सऊदी अरब भी कथित तौर पर F-35 लाइटनिंग II लड़ाकू विमानों को खरीदने के इनकार करने के बाद 54 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है।भारत भी दे सकता है राफेल का नया ऑर्डरइसके अलावा भारत भी अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनाती के लिए राफेल मरीन का एक बड़ा ऑर्डर फ्रांस को दे सकता है। इसके लिए दोनों देश समझौते के काफी करीब पहुंच गये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार 29 राफेल मरीन के ऑर्डर दे सकती है, जिसे फ्रांस साल 2029 तक सप्लाई करेगा। भारत के अलावा कोलंबिया, मोरक्को और इराक सहित कई अन्य देश भी राफेल का ऑर्डर देने पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक डसॉल्ट एडवांस F4 और F5 वेरिएंट के लिए भी कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है।डसॉल्ट एविएशन ने घोषणा की है कि वह कोविड-19 महामारी की वजह से सप्लाई चेन में आ रही समस्याओं की वजह से उबर रहा है और राफेल का उत्पादन बढ़ा रहा है। जनवरी 2025 में, डसॉल्ट ने 2024 में 21 राफेल मल्टीरोल फाइटर्स की डिलीवरी की पुष्टि की, जो 2023 में 13 थी। 31 दिसंबर 2024 तक, डसॉल्ट के बैकलॉग में 220 राफेल ऑर्डर थे, जो एक साल पहले 2023 में 211 यूनिट थे। हालांकि, डसॉल्ट उत्पादन में देरी को लगातार दूर करने की कोशिश कर रहा है।
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