जनता कर्फ़्यू से लॉकडाउन का संकेत शुरू हुआ और अब यह अपने चौथे पड़ाव पर है. इस दौरान मज़दूरों का पलायन, डॉक्टरों पर हमले और शराब की बिक्री पर विवाद जैसी कई बड़ी घटनाएं हुईं.
मार्च मध्य तक दुनिया भर में हालात बेहद गंभीर होने लगे और 19 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की लोगों को सम्बोधित किया. उन्होंने लोगों से 22 मार्च को सुबह सात से बजे रात नौ बजे तक ‘जनता कर्फ़्यू’ का पालन करने की अपील की.
इसी के साथ उन्होंने 25 मार्च से 14 अप्रैल तक के लिए देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया. लॉकडाउन के दौरान हर तरह की यातायात सुविधाएं जैसे बस, ट्रेन, ऑटो और कैब प्रतिबन्धित कर दी गईं. हवाई सेवाओं पर पहले ही रोक लग चुकी थी. अप्रैल की शुरुआत में दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तब्लीग़ी जमात के एक धार्मिक कार्यक्रम में जुटे लोगों को लेकर भी ख़ूब विवाद हुआ. तब्लीग़ी जमात के कई सदस्य और मरकज़ में शामिल हुए कई लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना वायरस पॉज़िटिव पाए गए थे.
16 अप्रैल को संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग इलाकों को रेड ज़ोन, ग्रीन ज़ोन, ऑरेंज ज़ोन और हॉटस्पॉट की श्रेणी में बांटा गया. ग्रीन ज़ोन में रहने वालों को पाबंदियों में सबसे ज़्यादा छूट मिली.इस दौरान प्रवासी मज़दूरों, बेघर और ग़रीब लोगों के लिए रोजी-रोटी की समस्या विकट रूप लेने लगी. हज़ारों मज़दूरों को दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों की सड़कों पर देखा गया.
कुछ सरकारों ने मज़दूरों के लिए आश्रय गृह, क्वारंटीन सेंटर और खाने-पीने की चीज़ों का इंतज़ाम भी किया लेकिन ये अप्रभावी और नाकाफ़ी साबित हुआ.बेरोज़गारी, चरमराती अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का संकट सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल से पाबंदियों में कुछ ढील दी. खेती, मनरेगा, निर्माण कार्य, दूध के कारोबार और कुछ दुकानों को खोले जाने का ऐलान किया गया.
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