हाल ही में किए गए एक देशव्यापी सर्वे में यह बात सामने आई है कि सीखने में शहर से ज्यादा समय गांव के लोग खर्च कर रहे हैं। वर्ष 2024 में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादा लोगों ने सीखने की गतिविधियों अर्थात् समय के उपयोग में अपना समय व्यतीत किया। अपनी विभिन्न दैनिक गतिविधियों के लिए लोग अपना समय कैसे आवंटित करते...
पीटीआई, नई दिल्ली। 'हर बात का वक्त मुकर्रर है, हर काम की शाद होती है; गर वक्त गया तो बात गई, बस वक्त की कीमत होती है।' समय की अहमियत को परखने और इसका उपयोग करने में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अब पुरुषों से पीछे नहीं हैं। हाल ही में किए गए एक देशव्यापी सर्वे में यह बात सामने आई है कि सीखने में शहर से ज्यादा समय गांव के लोग खर्च कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादा लोगों ने सीखने पर समय खर्च किया वर्ष 2024 में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादा लोगों ने सीखने की गतिविधियों अर्थात् समय के उपयोग में अपना समय व्यतीत किया। अपनी विभिन्न दैनिक गतिविधियों के लिए लोग अपना समय कैसे आवंटित करते हैं - इसी विषय पर आधारित सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में मंत्रालय ने सीखने की गतिविधि को औपचारिक शिक्षा पर बिताए गए समय के रूप में परिभाषित किया है। इसमें स्कूल/विश्वविद्यालय में उपस्थिति, पाठ्येतर गतिविधियां, होमवर्क और अन्य चीजें शामिल हैं। इसमें सीखने से संबंधित यात्रा का समय भी शामिल है। महिलाओं ने सीखने में जहां 84 मिनट का समय व्यतीत किया मंत्रालय की ओर से पहला टाइम यूज सर्वे जनवरी और दिसंबर, 2019 के दौरान किया गया था, जबकि दूसरा सर्वेक्षण जनवरी-दिसंबर 2024 के बीच आयोजित किया गया। इसमें छह वर्ष और उससे अधिक आयु वाले लोगों के लिए समय के उपयोग की जानकारी एकत्र की गई थी। दूसरे संस्करण के सर्वे से पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में महिलाओं ने पुरुषों के साथ सीखने की गतिविधियों पर बिताए जाने वाले समय के अंतर को कम कर दिया है। महिलाओं ने सीखने में जहां 84 मिनट का समय व्यतीत किया, वहीं पुरुषों द्वारा बिताया गया समय पिछले पांच वर्षों में 102 मिनट से घटकर 94 मिनट रह गया। शहरी क्षेत्रों में लोगों ने सीखने पर प्रतिदिन 87 मिनट खर्च किए यहां उल्लेखनीय बात यह है कि 2019 की तुलना में 2024 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सीखने की गतिविधि पर बिताया गया समय कम हो गया। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 में शहरी क्षेत्रों में लोगों ने सीखने पर प्रतिदिन 87 मिनट खर्च किए, जबकि 2019 में उन्होंने 95 मिनट खर्च किए। इसी तरह, वर्ष 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने 90 मिनट खर्च किए, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 92 मिनट था। मंत्रालय ने एक बयान में कही ये बात बहरहाल, मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत, आस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, अमेरिका और चीन जैसे उन कुछ देशों में शामिल है जो राष्ट्रीय स्तर पर टाइम यूज सर्वे कराते हैं ताकि यह विश्लेषण किया जा सके कि लोग अपनी विभिन्न दैनिक गतिविधियों के लिए अपना समय कैसे आवंटित करते हैं। सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य वैतनिक और अवैतनिक गतिविधियों से जुड़े पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी का पता लगाना है।.
पीटीआई, नई दिल्ली। 'हर बात का वक्त मुकर्रर है, हर काम की शाद होती है; गर वक्त गया तो बात गई, बस वक्त की कीमत होती है।' समय की अहमियत को परखने और इसका उपयोग करने में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अब पुरुषों से पीछे नहीं हैं। हाल ही में किए गए एक देशव्यापी सर्वे में यह बात सामने आई है कि सीखने में शहर से ज्यादा समय गांव के लोग खर्च कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादा लोगों ने सीखने पर समय खर्च किया वर्ष 2024 में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादा लोगों ने सीखने की गतिविधियों अर्थात् समय के उपयोग में अपना समय व्यतीत किया। अपनी विभिन्न दैनिक गतिविधियों के लिए लोग अपना समय कैसे आवंटित करते हैं - इसी विषय पर आधारित सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में मंत्रालय ने सीखने की गतिविधि को औपचारिक शिक्षा पर बिताए गए समय के रूप में परिभाषित किया है। इसमें स्कूल/विश्वविद्यालय में उपस्थिति, पाठ्येतर गतिविधियां, होमवर्क और अन्य चीजें शामिल हैं। इसमें सीखने से संबंधित यात्रा का समय भी शामिल है। महिलाओं ने सीखने में जहां 84 मिनट का समय व्यतीत किया मंत्रालय की ओर से पहला टाइम यूज सर्वे जनवरी और दिसंबर, 2019 के दौरान किया गया था, जबकि दूसरा सर्वेक्षण जनवरी-दिसंबर 2024 के बीच आयोजित किया गया। इसमें छह वर्ष और उससे अधिक आयु वाले लोगों के लिए समय के उपयोग की जानकारी एकत्र की गई थी। दूसरे संस्करण के सर्वे से पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में महिलाओं ने पुरुषों के साथ सीखने की गतिविधियों पर बिताए जाने वाले समय के अंतर को कम कर दिया है। महिलाओं ने सीखने में जहां 84 मिनट का समय व्यतीत किया, वहीं पुरुषों द्वारा बिताया गया समय पिछले पांच वर्षों में 102 मिनट से घटकर 94 मिनट रह गया। शहरी क्षेत्रों में लोगों ने सीखने पर प्रतिदिन 87 मिनट खर्च किए यहां उल्लेखनीय बात यह है कि 2019 की तुलना में 2024 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सीखने की गतिविधि पर बिताया गया समय कम हो गया। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 में शहरी क्षेत्रों में लोगों ने सीखने पर प्रतिदिन 87 मिनट खर्च किए, जबकि 2019 में उन्होंने 95 मिनट खर्च किए। इसी तरह, वर्ष 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने 90 मिनट खर्च किए, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 92 मिनट था। मंत्रालय ने एक बयान में कही ये बात बहरहाल, मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत, आस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, अमेरिका और चीन जैसे उन कुछ देशों में शामिल है जो राष्ट्रीय स्तर पर टाइम यूज सर्वे कराते हैं ताकि यह विश्लेषण किया जा सके कि लोग अपनी विभिन्न दैनिक गतिविधियों के लिए अपना समय कैसे आवंटित करते हैं। सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य वैतनिक और अवैतनिक गतिविधियों से जुड़े पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी का पता लगाना है।
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