सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों ने अधिनियम के तहत नियम भी नहीं बनाए हैं, जिसे छह महीने के भीतर किया जाना था. हमारा मानना है कि अधिनियम के कार्यान्वयन की स्थिति को ठीक करने की आवश्यकता है.
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अफसोस जताते हुए कहा कि ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016’ कानून लागू होने के 5 साल बाद इसका कार्यान्वयन पूरे भारत में निराशाजनक बना हुआ है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की खंडपीठ ने कहा कि कई राज्यों ने अधिनियम के तहत नियम भी नहीं बनाए हैं, जो इसके लागू होने के छह महीने के भीतर किए जाने थे.
कोर्ट ने पिछले साल इस मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जवाब मांगा था. हांगकांग, सिंगापुर में एवरेस्ट मासाले पर बैन, भारत सरकार हुई सख्त, उठाया बड़ा कदम, अब लैब में होगा… कोर्ट इन बातों पर काफी नाराजगी जताई- – आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने अधिनियम के तहत नियुक्त किए जाने वाले आयुक्तों की नियुक्ति नहीं की है.
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