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'ईरान, ताइवान से व्यापार तक', जिनपिंग को किसी मुद्दे पर नहीं मना सके डोनाल्ड ट्रंप, चीन से लौटना पड़ा खाली हाथ

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'ईरान, ताइवान से व्यापार तक', जिनपिंग को किसी मुद्दे पर नहीं मना सके डोनाल्ड ट्रंप, चीन से लौटना पड़ा खाली हाथ
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डोनाल्ड ट्रंप अक्सर दुनिया के नेताओं पर हावी होते देखे जाते रहे हैं, जिनके साथ वह बैठक करते हैं लेकिन चीन में चीजें रही हैं। जिनपिंग ने मजबूती से उनके सामने बात रखी और दोनो पक्ष इस दौरे से कुछ खास नहीं निकाल सके।

दुबई: डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार दोपहर को अपनी बहुचर्चित चीन यात्रा पूरी करने के बाद बीजिंग से अमेरिका के लिए रवाना हो गए। 2017 में चीन की यात्रा करने के 9 साल बाद ट्रंप का ये बीजिंग दौरा हुआ। उनकी इस यात्रा से अमेरिका-चीन संबंधों या ताइवान-ईरान जैसे मुद्दों पर किसी ऐलान की उम्मीद की जा रही थी। दोनों पक्षों ने शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत को सकारात्मक बताते हुए संबंधों में बेहतरी की बात कही है लेकिन इस दौरे का कोई बड़ा नतीजा नहीं दिखा है। एक्सपर्ट ने ट्रंप की बीजिंग से वापसी को 'खाली हाथ लौटना' करार दिया है।डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग से जाते हुए ऐसा कोई संकेत नहीं दिया, जिससे लगे कि अमेरिका-चीन ने अपने संबंधों की चुनौतियों को सुलझा लिया है। ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट, ताइवान और व्यापार के मुद्दे पर कोई उत्साहजनक बयान नहीं आया है। ट्रंप की इस यात्रा के दौरान माहौल भी मिलाजुला रहा। कुछ मौकों पर दोनों ओर से गर्मजोशी दिखी तो ताइवान मुद्दे पर चीन का सख्त रुख भी देखा गया।ईरान पर नहीं बातडोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे से काफी पहले से उनका प्रशासन चीन पर दबाव डालता रहा है कि वह ईरान पर समझौते का दबाव बनाए। बीजिंग में 40 घंटे से ज्यादा बिताने और जिनपिंग के साथ कई बैठकें करने के बाद जब ट्रंप लौटे तो इस बात का कोई खास सबूत नहीं मिला कि ईरान पर कोई सहमति दोनों में बनी है। कह सकते हैं कि ट्रंप चीन को ईरान पर दबाव बनाने के लिए मनाने में कामयाब रहे। ईरान युद्ध से जुड़ा एक मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का है। वाइट हाउस ने दावा किया कि चीन और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए खुला रखा जाना चाहिए। हालांकि चीन ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह इसके लिए विशेष रूप से ईरान से कहेगा। चीनी बयान में ईरानी टोल या जलडमरूमध्य के सैन्यीकरण का जिक्र नहीं है।ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चीनवाइट हाउस ने गुरुवार को कहा था कि ट्रंप और जिनपिंग इस बात पर सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। चीनी बयान में ऐसा कोई भरोसा अमेरिका को नहीं दिया गया है कि वह इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ है। चीन ने कूटनीति की पंरपरिक भाषा में कहा है कि सभी मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए।ईरान के अलावा ताइवान दोनों देशों में एक अहम मुद्दा रहा है। ताइवान पर ट्रंप को इस दौरे से कुछ हासिल नहीं हुआ उल्टे शी जिनपिंग ने उनको इस मुद्दे पर लगभग चेतावनी दे दी। शी ने ट्रंप से मुलाकात में कह दिया कि ताइवान उसके लिए रेड लाइ है और यह मुद्दा दोनों देशों के बीच टकराव और सैन्य संघर्ष तक की वजह बन सकता है।व्यापार और आर्थिक सौदे यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने कहा था कि ट्रंप की यात्रा के परिणामस्वरूप चीन उनसे बड़े पैमाने पर खाद्य और दूसरी सामग्री खरीदने का ऐलान कर सकता है। हकीकत में ऐसा कोई बड़ा ऐलान चीन की ओर से नहीं किया गया है। व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रंप के पास बीजिंग से वापस जाते हुए दिखाने के लिए कुछ खास नहीं है। ऐसे में अगर कहा जाए कि दुनिया पर आक्रामक रहने वाले ट्रंप को चीन ने खाली हाथ लौटा दिया तो यह पूरी तरह गलत नहीं है।.

दुबई: डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार दोपहर को अपनी बहुचर्चित चीन यात्रा पूरी करने के बाद बीजिंग से अमेरिका के लिए रवाना हो गए। 2017 में चीन की यात्रा करने के 9 साल बाद ट्रंप का ये बीजिंग दौरा हुआ। उनकी इस यात्रा से अमेरिका-चीन संबंधों या ताइवान-ईरान जैसे मुद्दों पर किसी ऐलान की उम्मीद की जा रही थी। दोनों पक्षों ने शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत को सकारात्मक बताते हुए संबंधों में बेहतरी की बात कही है लेकिन इस दौरे का कोई बड़ा नतीजा नहीं दिखा है। एक्सपर्ट ने ट्रंप की बीजिंग से वापसी को 'खाली हाथ लौटना' करार दिया है।डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग से जाते हुए ऐसा कोई संकेत नहीं दिया, जिससे लगे कि अमेरिका-चीन ने अपने संबंधों की चुनौतियों को सुलझा लिया है। ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट, ताइवान और व्यापार के मुद्दे पर कोई उत्साहजनक बयान नहीं आया है। ट्रंप की इस यात्रा के दौरान माहौल भी मिलाजुला रहा। कुछ मौकों पर दोनों ओर से गर्मजोशी दिखी तो ताइवान मुद्दे पर चीन का सख्त रुख भी देखा गया।ईरान पर नहीं बातडोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे से काफी पहले से उनका प्रशासन चीन पर दबाव डालता रहा है कि वह ईरान पर समझौते का दबाव बनाए। बीजिंग में 40 घंटे से ज्यादा बिताने और जिनपिंग के साथ कई बैठकें करने के बाद जब ट्रंप लौटे तो इस बात का कोई खास सबूत नहीं मिला कि ईरान पर कोई सहमति दोनों में बनी है। कह सकते हैं कि ट्रंप चीन को ईरान पर दबाव बनाने के लिए मनाने में कामयाब रहे। ईरान युद्ध से जुड़ा एक मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का है। वाइट हाउस ने दावा किया कि चीन और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए खुला रखा जाना चाहिए। हालांकि चीन ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह इसके लिए विशेष रूप से ईरान से कहेगा। चीनी बयान में ईरानी टोल या जलडमरूमध्य के सैन्यीकरण का जिक्र नहीं है।ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चीनवाइट हाउस ने गुरुवार को कहा था कि ट्रंप और जिनपिंग इस बात पर सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। चीनी बयान में ऐसा कोई भरोसा अमेरिका को नहीं दिया गया है कि वह इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ है। चीन ने कूटनीति की पंरपरिक भाषा में कहा है कि सभी मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए।ईरान के अलावा ताइवान दोनों देशों में एक अहम मुद्दा रहा है। ताइवान पर ट्रंप को इस दौरे से कुछ हासिल नहीं हुआ उल्टे शी जिनपिंग ने उनको इस मुद्दे पर लगभग चेतावनी दे दी। शी ने ट्रंप से मुलाकात में कह दिया कि ताइवान उसके लिए रेड लाइ है और यह मुद्दा दोनों देशों के बीच टकराव और सैन्य संघर्ष तक की वजह बन सकता है।व्यापार और आर्थिक सौदे यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने कहा था कि ट्रंप की यात्रा के परिणामस्वरूप चीन उनसे बड़े पैमाने पर खाद्य और दूसरी सामग्री खरीदने का ऐलान कर सकता है। हकीकत में ऐसा कोई बड़ा ऐलान चीन की ओर से नहीं किया गया है। व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रंप के पास बीजिंग से वापस जाते हुए दिखाने के लिए कुछ खास नहीं है। ऐसे में अगर कहा जाए कि दुनिया पर आक्रामक रहने वाले ट्रंप को चीन ने खाली हाथ लौटा दिया तो यह पूरी तरह गलत नहीं है।

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