Recursive Superintelligence नाम के नए AI स्टार्टअप ने सिर्फ 6 दिनों में 6,238 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाई है। दावा है कि यह तकनीक भविष्य में खुद अपनी कमियां पहचानकर बिना इंसानी मदद के खुद को अपग्रेड कर सकेगी।
6 दिन में जुटाए 6,238 करोड़: आखिर इस रहस्यमयी AI तकनीक में ऐसा क्या है, जिस पर दुनिया के अरबपति लगा रहे हैं दांव?
Recursive Superintelligence नाम के नए AI स्टार्टअप ने सिर्फ 6 दिनों में 6,238 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाई है। दावा है कि यह तकनीक भविष्य में खुद अपनी कमियां पहचानकर बिना इंसानी मदद के खुद को अपग्रेड कर सकेगी।मॉडल को बेहतर बनाते आए हैं, लेकिन सैन फ्रांसिस्को के नए स्टार्टअप ‘रिकर्सिव सुपरइंटेलिजेंस’ का दावा है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद को डिजाइन करेगी, अपनी कमियों को पहचानेगी और इंसानी मदद के बिना खुद को अपग्रेड भी करेगी। यानी एआई का भविष्य इंसान नहीं, बल्कि खुद मशीनें तय करेंगी। एआई शोधकर्ता रिचर्ड सोचर के साथ इस अभियान में पीटर नॉर्विग और गूगल डीपमाइंड में आत्म-सुधार अनुसंधान का नेतृत्व कर चुके टिम रॉकटैशेल जैसे दिग्गज शामिल हैं। स्टार्टअप ने लॉन्च के कुछ ही दिनों में 650 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग जुटा ली है।‘रिकर्सिव सेल्फ-इंप्रूवमेंट’ ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एआई पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करती है। यह अपनी आंतरिक कमियों और सीमाओं को खुद पहचानती है और बिना मानवीय हस्तक्षेप के खुद को लगातार बेहतर बनाती रहती है। इतना ही नहीं, नए सुधारों का परीक्षण और सत्यापन भी एआई स्वयं करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में निर्माता और उत्पाद के बीच का अंतर लगभग खत्म हो सकता है।इस कंपनी का तकनीकी मॉडल ‘ओपन-एंडेडनेस’ नामक सिद्धांत पर आधारित है, जो जैविक विकास की तरह काम करता है। इसमें दो एआई सिस्टम एक साथ विकसित होते हैं और लगातार एक-दूसरे की कमजोरियों और सीमाओं को खोजते रहते हैं। दावा किया जा रहा है कि यह प्रक्रिया इतनी बारीक और कठोर सुरक्षा जांच कर सकती है, जिसे किसी इंसानी टीम के लिए करना बेहद मुश्किल होगा।रिचर्ड सोचर का मानना है कि जब वास्तविक आरएसआई हासिल हो जाएगा, तब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कोड कैसे लिखा जाए, बल्कि यह होगा कि इस असीमित बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल सबसे पहले कहां किया जाए। उनके मुताबिक भविष्य में एआई यह तय करने में मदद कर सकती है कि किस बीमारी का इलाज पहले खोजा जाए या किस वैश्विक संकट को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।इस तकनीक ने टेक इंडस्ट्री में नई बहस भी छेड़ दी है। कुछ विशेषज्ञ इसे मानव सभ्यता के लिए अगला बड़ा कदम मान रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि खुद को लगातार बेहतर बनाने वाली एआई भविष्य में नियंत्रण से बाहर भी जा सकती है। फिलहाल ‘रिकर्सिव सुपरइंटेलिजेंस’ पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि यह तकनीक आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।6 दिन में जुटाए 6,238 करोड़: आखिर इस रहस्यमयी AI तकनीक में ऐसा क्या है, जिस पर दुनिया के अरबपति लगा रहे हैं दांव?
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