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Explainer: अमेरिका-इजराइल से लड़ने के बाद भी कैसे मजबूती से खड़ा है ईरान? जानें सैन्य और रणनीतिक शक्ति

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Explainer: अमेरिका-इजराइल से लड़ने के बाद भी कैसे मजबूती से खड़ा है ईरान? जानें सैन्य और रणनीतिक शक्ति
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Explainer: इजरायल-अमेरिका के साथ युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कैसे इतनी मजबूती से खड़ा है? आइये जानते हैं ईरान की सैन्य शक्ति, अर्थव्यवस्था और उसकी रणनीति एकदम विस्तार से…

Explainer: अमेरिका-इजराइल से लड़ने के बाद भी कैसे मजबूती से खड़ा है ईरान? जानें सैन्य और रणनीतिक शक्ति Explainer: इजरायल-अमेरिका के साथ युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कैसे इतनी मजबूती से खड़ा है?

आइये जानते हैं ईरान की सैन्य शक्ति, अर्थव्यवस्था और उसकी रणनीति एकदम विस्तार से…Explainer: इजरायल-अमेरिका के साथ युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कैसे इतनी मजबूती से खड़ा है? आइये जानते हैं ईरान की सैन्य शक्ति, अर्थव्यवस्था और उसकी रणनीति एकदम विस्तार से…Explainer: मध्य पूर्व देशों में ईरान एक ऐसा देश है, जो पिछले कई दशकों से लगातार संघर्ष, आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक दबाव और सैन्य चुनौतियों का सामना कर रहा है.

हाल में इस्राइल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और विभिन्न सैन्य अभियानों में नुकसान झेलने के बावजूद ईरान आज भी मजबूत दिखाई दे रहा है. खास बात है कि ईरान सिर्फ मजबूती के साथ खड़ा नहीं दिख रहा है बल्कि इस्राइल और ईरान का मजबूती से जवाब भी दे रहा है. अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या है, जो ईरान को लगातार संकटों के बीच में मजबूत बनाए हुए हैं.

क्या इसकी वजह सिर्फ सैन्य शक्ति है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति काम कर रही है? आइए विस्तार से समझते हैं…अमेरिका और पश्चिमी देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं. इन प्रतिबंधों के कारण…महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी. लेबनान और गाजा से जुड़े विवाद इजरायल के साथ तनाव- इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से लंबे समय से तनाव बना हुआ है.

दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टकराव लगातार बढ़ते रहे हैं. बावजूद इसके ईरान का राजनीतिक और सैन्य ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा. ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है. ईरान की सीमाएं इराक, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, आर्मेनिया जैसे देशों से जुड़ी हैं.

इसके अलावा ईरान की पहुंच फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट तक है. ईरान की सेना तकनीकी रूप से अमेरिका या फिर इजरायल जैसी आधुनिक नहीं मानी जाती. लेकिन उसकी रणनीतिक क्षमता काफी मजबूत है. ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में IRGC की बड़ी भूमिका है.

IRGC देश की सुरक्षा, मिसाइल कार्यक्रम, विदेशी अभियानों और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर महत्वपूर्ण रूप से नियंत्रण रखता है. ईरान ने पिछले कई वर्षों में अपने मिसाइल कार्यक्रम को काफी अधिक विकसित कर लिया है. ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. ईरान के पास हजारों किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली कई मिसाइलें हैं.

ड्रोन तकनीक में भी ईरान ने तेजी से प्रगति की है. यही वजह है कि ईरान के विरोधी देशों को हमेशा सैन्य प्रतिक्रिया का खतरा बना रहता है. ईरान के पास 6 लाख से अधिक एक्टिव सैनिक और लाखों रिजर्व सैनिक हैं. भारी हथियारों की बजाय, ईरान सस्ते और प्रभावी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों पर निर्भर है.

खास बात है कि ईरान के ये सस्ते हथियार महंगे-महंगे अमेरिकी और इजरायली रक्षा प्रणालियों पर भारी पड़ते हैं. Explainer: आखिर क्या है 'शिगेला' इन्फेक्शन? जिसके डर से रेस्टोरेंट में खाना नहीं खा रहे लोग; जानें इससे कैसे बच सकते हैं आप? ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडारों में से एक पर बैठा हुआ है.

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जिस पर ईरान का नियंत्रण है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है. रिपोर्ट्स की मानें तो दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है. यही कारण है कि वैश्विक शक्तियां ईरान को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकतीं.

इसके बंद होने से वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जो ईरान को अप्रत्याशित वित्तीय लाभ देती हैं. चीन जैसे देश छिपे हुए रास्ते से भारी मात्रा में रियायती तेल खरीदते हैं, जिससे ईरान की अरबों डॉलर की कमाई होती है. ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत उसका"प्रॉक्सी नेटवर्क" माना जाता है. इसका मतलब है कि ईरान सीधे युद्ध लड़ने की बजाय विभिन्न सहयोगी समूहों के माध्यम से अपना प्रभाव बनाए रखता है.

लेबनान का हिजबुल्लाह, इराक के कई शिया समूह, यमन के हूती विद्रोही और सीरिया में सहयोगी बल. इन समूहों की मौजूदगी ईरान को पूरे मध्य पूर्व में प्रभाव बनाए रखने में मदद करती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, यही नेटवर्क ईरान की"रणनीतिक गहराई" बनाता है. Explainer: क्या इस बार संसद में पास हो जाएगा परिसीमन बिल?

TMC सासंदों के NDA में आने से कितना बदला नंबर गेम? लंबे प्रतिबंधों के कारण ईरान लगभग आत्मनिर्भर हो चुका है. ईरान अपनी रक्षा जरूरतों और बुनियादी ढांचे के लिए स्थानीय उत्पादन पर जोर देता है. ईरान ने रक्षा उत्पादन, कृषि, औद्योगिक उपकरण और चिकित्सा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया है.

इससे ईरान की सभी समस्याएं हल नहीं हुईं, लेकिन बाहरी दबाव का असर कुछ हद तक कम हुआ है. ईरान में राजनीतिक व्यवस्था धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान के मिश्रण पर आधारित है. बाहरी दबाव और सैन्य खतरे अक्सर देश के भीतर राष्ट्रवाद को मजबूत करते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब किसी देश पर बाहरी खतरा बढ़ता है तो कई बार जनता सरकार के पीछे एकजुट हो जाती है.

ईरान में भी कई अवसरों पर ऐसा देखने को मिला है. इस सवाल का एक ही जवाब है- नहीं. ईरान अब भी कई गंभीर चुनौतियों को झेल रहा है. जिसमें युवाओं में बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असंतोष, राजनीतिक विरोध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल है.

सभी समस्याएं भविष्य में ईरान के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं. इसके अलावा, अगर हम इंटरनेशनल संघर्ष की और बढ़ते हैं तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है. Explainer: सिर्फ 4 LPG सिलेंडरों पर ही क्यों मिलेगी सब्सिडी? मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच जानें आखिर क्या है इस फैसले की असल वजह एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की ताकत सिर्फ उसकी सेना नहीं है, बल्कि उसकी बहुआयामी रणनीति है.

ईरान भविष्य में भौगोलिक स्थिति, ऊर्जा संसाधनों, क्षेत्रीय प्रभाव, मिसाइल क्षमता और सहयोगी नेटवर्क के दम पर अपने विरोधियों के सामने संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकता है. हालांकि लगातार युद्ध, प्रतिबंध और आर्थिक चुनौतियां उसके लिए खतरा बनी रहेंगी.

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