बसपा अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों पर संभावित उपचुनाव अपने बलबूते चुनाव लड़ने की बात कहकर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बसपा सुप्रीमो मायावती के अकेले विधानसभा उपचुनाव लड़ने के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी ने कहा कि अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. सपा के कार्यालय में सन्नाटा छाया हुआ है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने लोकसभा क्षेत्र आजमगढ़ दौरे पर हैं.
बसपा के इस रुख पर पूछे जाने पर सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा,"नहीं अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं है. अखिलेश यादव ही तय करेंगे कि क्या हुआ है और इसमें कितनी सच्चाई है. चूंकि कोई आधिकारिक रुख तो है नहीं, यह तो बाहर का सुना सुनाया मामला है. क्या बात हुई, क्या मामला है उसे समझना पड़ेगा. अखिलेश यादव आजमगढ़ में हैं, वह आ जाएं फिर कुछ कहा जाएगा." उन्होंने कहा कि 'किसी के पास उनका आधिकारिक बयान नहीं है इसलिए अभी इंतजार करना होगा.
लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिये सोमवार को उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बैठक में मायावती ने बसपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की जरूरत पर बल देते हुये पार्टी पदाधिकारियों को उपचुनाव की तैयारियां तेज करने को कहा है. बसपा, हालांकि अब तक उपचुनाव नहीं लड़ती थी. इसके मद्देनजर मायावती का यह निर्देश अहम माना जा रहा है. लोकसभा चुनाव में बसपा को 10 और सपा को महज पांच सीट मिल सकी. सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी थी.
सूत्रों के अनुसार मायावती ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सहयोगी, सपा का यादव वोटबैंक बसपा के पक्ष में स्थानांतरित नहीं होने की दलील देते हुये बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि अब ‘गठबंधनों’ पर निर्भर रहने के बजाय पार्टी का संगठन मजबूत कर बसपा अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा.
समझा जाता है कि मायावती ने सपा से अलग हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की वजह से भी गठबंधन को चुनाव में नुकसान होने की बात कही. उन्होंने कहा कि शिवपाल के अलग चुनाव लड़ने के कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य भी चुनाव हार गये. उन्होंने माना कि चुनाव में पारिवारिक कलह का नुकसान गठबंधन को उठाना पड़ा.
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