ट्यूमर ऐसी जगह था कि शुरुआत में उसकी बायोप्सी करना मुश्किल हो गया। बाद में एक खास सर्जन ने यह ट्यूमर निकालकर टेस्ट के लिए भेजा। करीब दो हफ्ते बाद बायोप्सी की रिपोर्ट आई और पता चला कि यह ट्यूमर कैंसर है।
कैंसर एक एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है जिसके लक्षण चकमा देते हैं और कई बार तब पता चलते हैं, जब बहुत देर हो चुकी होती है। लंदन की एक मार्केटिंग एजेंसी में काम करने वाले 32 वर्षीय पावेल च्मूरा के साथ ऐसा ही हुआ। यह शख्स जिन लक्षणों को टॉन्सिल समझ रहा था, वो असल में माउथ कैंसर के लक्षण थे। पावेल को बार-बार होने वाली टॉन्सिल की समस्या के पीछे कुछ गड़बड़ महसूस हो रही थी और इसी शक ने उनकी जीभ के नीचे छुपा हुआ कैंसर ट्यूमर पकड़ने में मदद की। उन्होंने पहली बार 2023 के अंत में टॉन्सिल की दिक्कत की जांच करवाई। इसे अक्सर टॉन्सिल हो जाते थे, जिससे बार-बार एंटीबायोटिक लेना पड़ रहा था।डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 की शुरुआत में उन्हें एक इंफेक्शन स्पेशलिस्ट के पास भेजा गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके टॉन्सिल तो बिल्कुल ठीक हैं लेकिन एमआरआई में कुछ गड़बड़ दिखाई दे रही है। ट्यूमर ऐसी जगह था कि शुरुआत में उसकी बायोप्सी करना मुश्किल हो गया। बाद में एक खास सर्जन ने यह ट्यूमर निकालकर टेस्ट के लिए भेजा। करीब दो हफ्ते बाद बायोप्सी की रिपोर्ट आई और पता चला कि यह ट्यूमर कैंसर है।डॉक्टर को देखते ही समझ गया कुछ गड़बड़ है पावेल बताते हैं कि वह हमेशा की तरह पॉज़िटिव थे और सोच रहे थे कि जांच की रिपोर्ट सामान्य ही आएगी। लेकिन जैसे ही वह कमरे में दाखिल हुए और डॉक्टर व नर्स को गंभीर चेहरे के साथ बैठे देखा, उन्हें तुरंत महसूस हुआ कि स्थिति गंभीर है। डॉक्टर ने बैठकर कहा, 'दुर्भाग्य से यह कैंसर है।' यह सुनते ही उनके दिमाग में सबसे पहला ख्याल आया कि वह यह खबर अपने माता-पिता को कैसे बताएं।की गई बड़ी सर्जरी अप्रैल 2024 में क्रॉमवेल हॉस्पिटल में उनकी बड़ी सर्जरी की गई, जिसमें मुंह का निचला हिस्सा हटाया गया, गर्दन की जटिल सर्जरी की गई और हाथ से ऊतक निकालकर मुंह में ट्रांसप्लांट किया गया। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद सूजन और सांस लेने की समस्या को कंट्रोल करने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी भी करनी पड़ी।तेज दवाओं का असर पावेल आईसीयू के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि वह समय बेहद मुश्किल था। वह इतनी तेज दवाइयों पर थे कि सब कुछ धुंधला महसूस होता था। रात में नींद नहीं आती, अजीब सपने आते और मॉनिटर की लगातार चलती बीप-बीप उनकी बेचैनी बढ़ा देती थी।सर्जरी के बाद नई जिंदगी सर्जरी के बाद उन्हें अपनी जीभ को दोबारा इस्तेमाल करना सीखना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी जीभ अब पहले जितनी लचीली नहीं है और वह उसे बाहर नहीं निकाल सकते। तीन महीने बाद वह काम पर लौट आए, लेकिन मन में कैंसर की दोबारा वापसी का डर आज भी कहीं छिपा रहता है।पावेल ने दिया खास मैसेज पावेल अपनी कहानी इसलिए साझा कर रहे हैं ताकि लोग अपने स्वास्थ्य संकेतों को नजरअंदाज न करें। उनका कहना है कि अगर शरीर में कुछ गलत लगे तो तुरंत जांच करवाएं। अगर मैं जिद नहीं करता, तो पता नहीं यह कैंसर कब पता चलता।इन लक्षणों पर रखें नजर बार-बार माउथ अल्सर होना, मुंह के अंदर लाल या सफेद पैच दिखना, दांतों का ढीला पड़ना, निगलने में परेशानी आना, आवाज का बैठ जाना, बोलने में दिक्कत होना और मुंह या जबड़े में सूजन या कोई गांठ महसूस होना। ये सभी माउथ कैंसर के आम और गंभीर लक्षण माने जाते हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।.
कैंसर एक एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है जिसके लक्षण चकमा देते हैं और कई बार तब पता चलते हैं, जब बहुत देर हो चुकी होती है। लंदन की एक मार्केटिंग एजेंसी में काम करने वाले 32 वर्षीय पावेल च्मूरा के साथ ऐसा ही हुआ। यह शख्स जिन लक्षणों को टॉन्सिल समझ रहा था, वो असल में माउथ कैंसर के लक्षण थे। पावेल को बार-बार होने वाली टॉन्सिल की समस्या के पीछे कुछ गड़बड़ महसूस हो रही थी और इसी शक ने उनकी जीभ के नीचे छुपा हुआ कैंसर ट्यूमर पकड़ने में मदद की। उन्होंने पहली बार 2023 के अंत में टॉन्सिल की दिक्कत की जांच करवाई। इसे अक्सर टॉन्सिल हो जाते थे, जिससे बार-बार एंटीबायोटिक लेना पड़ रहा था।डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 की शुरुआत में उन्हें एक इंफेक्शन स्पेशलिस्ट के पास भेजा गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके टॉन्सिल तो बिल्कुल ठीक हैं लेकिन एमआरआई में कुछ गड़बड़ दिखाई दे रही है। ट्यूमर ऐसी जगह था कि शुरुआत में उसकी बायोप्सी करना मुश्किल हो गया। बाद में एक खास सर्जन ने यह ट्यूमर निकालकर टेस्ट के लिए भेजा। करीब दो हफ्ते बाद बायोप्सी की रिपोर्ट आई और पता चला कि यह ट्यूमर कैंसर है।डॉक्टर को देखते ही समझ गया कुछ गड़बड़ है पावेल बताते हैं कि वह हमेशा की तरह पॉज़िटिव थे और सोच रहे थे कि जांच की रिपोर्ट सामान्य ही आएगी। लेकिन जैसे ही वह कमरे में दाखिल हुए और डॉक्टर व नर्स को गंभीर चेहरे के साथ बैठे देखा, उन्हें तुरंत महसूस हुआ कि स्थिति गंभीर है। डॉक्टर ने बैठकर कहा, 'दुर्भाग्य से यह कैंसर है।' यह सुनते ही उनके दिमाग में सबसे पहला ख्याल आया कि वह यह खबर अपने माता-पिता को कैसे बताएं।की गई बड़ी सर्जरी अप्रैल 2024 में क्रॉमवेल हॉस्पिटल में उनकी बड़ी सर्जरी की गई, जिसमें मुंह का निचला हिस्सा हटाया गया, गर्दन की जटिल सर्जरी की गई और हाथ से ऊतक निकालकर मुंह में ट्रांसप्लांट किया गया। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद सूजन और सांस लेने की समस्या को कंट्रोल करने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी भी करनी पड़ी।तेज दवाओं का असर पावेल आईसीयू के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि वह समय बेहद मुश्किल था। वह इतनी तेज दवाइयों पर थे कि सब कुछ धुंधला महसूस होता था। रात में नींद नहीं आती, अजीब सपने आते और मॉनिटर की लगातार चलती बीप-बीप उनकी बेचैनी बढ़ा देती थी।सर्जरी के बाद नई जिंदगी सर्जरी के बाद उन्हें अपनी जीभ को दोबारा इस्तेमाल करना सीखना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी जीभ अब पहले जितनी लचीली नहीं है और वह उसे बाहर नहीं निकाल सकते। तीन महीने बाद वह काम पर लौट आए, लेकिन मन में कैंसर की दोबारा वापसी का डर आज भी कहीं छिपा रहता है।पावेल ने दिया खास मैसेज पावेल अपनी कहानी इसलिए साझा कर रहे हैं ताकि लोग अपने स्वास्थ्य संकेतों को नजरअंदाज न करें। उनका कहना है कि अगर शरीर में कुछ गलत लगे तो तुरंत जांच करवाएं। अगर मैं जिद नहीं करता, तो पता नहीं यह कैंसर कब पता चलता।इन लक्षणों पर रखें नजर बार-बार माउथ अल्सर होना, मुंह के अंदर लाल या सफेद पैच दिखना, दांतों का ढीला पड़ना, निगलने में परेशानी आना, आवाज का बैठ जाना, बोलने में दिक्कत होना और मुंह या जबड़े में सूजन या कोई गांठ महसूस होना। ये सभी माउथ कैंसर के आम और गंभीर लक्षण माने जाते हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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