रायपुर में लिफ्ट में फंसने की बढ़ती घटनाओं के बीच सरकार की लिफ्ट सुरक्षा नियमों के लागू होने के बाद भी कार्रवाई न होने पर सवाल उठ रहे हैं। कलेक्टर ने संयुक्त टीम बनाकर जांच का आदेश दिया है।
रायपुर में पिछले 20-25 दिनों में लिफ्ट में फंसने की चार घटनाएं सं Czechoslovakia करीबन सुर्खियां बन रही हैं। छत्तीसगढ़ में लिफ्ट संबंधी नियम लागू हुए एक साल से ज्यादा हो गए, किन्तु कार्रवाई शून्य है। यह महत्वपूर्ण है कि सरकार ने लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए सभी लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण अनिवार्य कर दिया था, लेकिन नियम लागू होने से लगभग 12-13 महीने बाद भी लिफ्ट में फंसने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इन घटनाओं में महिला आईआईएएस अधिकारी, राजनेता और आम लोग शामिल हैं जो कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और रेसिडेंशियल मल्टीस्टोरी आवासों की लिफ्टों में फंस गए। हाल ही में रायपुर के सड्डू क्षेत्र की एक आवासीय बहुमंजिला इमारत की लिफ्ट में एक युवक लगभग 20-25 मिनट तक फंसा रहा। इन लगातार घटनाओं के बावजूद, कहीं भी किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच रायपुर कलेक्टर ने नगर निगम, सीएसपीडीसीएल, पुलिस, टाउन एंड कंट्री प्लॉनिंग एवं होमगार्ड की संयुक्त टीम बनाई है। यह टीम शॉपिंग मॉल, बड़े व्यावसायिक भवन, अस्पताल और मल्टीस्टोरी परिसरों में लगी लिफ्टों की औचित जांच करेगी। मaintinence रेकॉर्ड, इमरजेंसी नंबर, सुरक्षा इंतजाम और तकनीकी मानकों पर भी जांच होगी। यदि कोई खामी पाई जाए तो सीधे भवन स्वामी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अब यह सवाल प्रबल होता है कि नियम लागू होने के बाद से एक साल से अधिक समय बीत गया है, लेकिन कितने लोगों ने लिफ्ट का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण करवाया है?
संबंधित विभागों ने इस एक साल में कितनी जगहों पर लिफ्ट का निरीक्षण किया और खामियों मिलने पर कितनी कार्रवाई हुई? सिर्फ नियम बनाने और दिशा-निर्देश जारी करने से कुछ नहीं होता; सरकार को दोषियों पर दण्डात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता है। लिफ्ट सुरक्षा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मुद्दा है जिस पर दृस्टिकोण और कार्यान्वयन दोनों में गंभीर अनिश्चलता दिख रही है
लिफ्ट सुरक्षा रायपुर लिफ्ट घटना छत्तीसगढ़ सरकार नियम लिफ्ट पंजीकरण भवन सुरक्षा




