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राजस्थान में बिल्डिंग बनाने के नए नियम, ऊंचाई पर अब कोई लिमिट नहीं, पर ध्यान रखनी होगी ये बातें

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राजस्थान में बिल्डिंग बनाने के नए नियम, ऊंचाई पर अब कोई लिमिट नहीं, पर ध्यान रखनी होगी ये बातें
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राजस्थान में हाईराइज या कहें बहमुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। लेकिन नए प्रावधानों के तहत नए बिल्डिंग बायलॉज में 'नेशनल बिल्डिंग कोड' की जगह 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' को लागू कर दिया गया है।

राजस्थान में बिल्डिंग बनाने के नए नियम, ऊंचाई पर अब कोई लिमिट नहीं, पर ध्यान रखनी होगी ये बातेंराजस्थान में हाईराइज या कहें बहमुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। लेकिन नए प्रावधानों के तहत नए बिल्डिंग बायलॉज में 'नेशनल बिल्डिंग कोड' की जगह 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' को लागू कर दिया गया है।राजस्थान सरकार ने शहरी विकास की दिशा में नया और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य में नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू कर दिए हैं। वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब बिल्डिंग बायलॉज में इतना बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब प्रदेश के शहरों में बहुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा सालों पुराना प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिया गया है।की ही इमारतें बनाने की अनुमति थी। साल 2020 में राज्य की सबसे ऊंची फायर लेडर की क्षमता को आधार बनाकर यह 70 मीटर की सीमा तय की गई थी।: नए प्रावधानों के तहत तय मापदंडों का पालन करने पर भवन की ऊंचाई कितनी भी बढ़ाई जा सकेगी।ऊंचाई का प्रतिबंध हटाने का यह फैसला केवल उन्हीं इमारतों पर लागू होगा, जिनमें अत्याधुनिक और पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम उपलब्ध होगा।पहले भवन निर्माण की फायर एनओसी लेने से पहले भवन की ऊंचाई से संबंधित दस्तावेज मांगे जाते थे, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती थी। अब इसे व्यावहारिक बनाया गया है।नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में एक और तकनीकी बदलाव करते हुए 'नेशनल बिल्डिंग कोड' की जगह 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।अब किसी भी भवन की निर्माण स्वीकृति से पहले पंजीकृत आर्किटेक्ट और संबंधित हितधारकों को 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।यह नया कोड मुख्य रूप से भवन निर्माण स्वीकृति, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित है।शहरी विकास और आवासन विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाते हुए मॉनिटरिंग व्यवस्था को सख्त कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अगर शहरों में बिना वैध भवन स्वीकृति के किसी भी मकान या व्यावसायिक इमारत का निर्माण होता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। यूडीएच विभाग ने सभी निकायों और विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को इसकी पालना सुनिश्चित करने के लिए पाबंद कर दिया है।सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर राजस्थान के महानगरों में 'स्काईस्क्रेपर्स' बनने का रास्ता साफ होगा, वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई रफ्तार मिलेगी।खुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है। विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना। पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद.

राजस्थान में बिल्डिंग बनाने के नए नियम, ऊंचाई पर अब कोई लिमिट नहीं, पर ध्यान रखनी होगी ये बातेंराजस्थान में हाईराइज या कहें बहमुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। लेकिन नए प्रावधानों के तहत नए बिल्डिंग बायलॉज में 'नेशनल बिल्डिंग कोड' की जगह 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' को लागू कर दिया गया है।राजस्थान सरकार ने शहरी विकास की दिशा में नया और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य में नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू कर दिए हैं। वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब बिल्डिंग बायलॉज में इतना बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब प्रदेश के शहरों में बहुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा सालों पुराना प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिया गया है।की ही इमारतें बनाने की अनुमति थी। साल 2020 में राज्य की सबसे ऊंची फायर लेडर की क्षमता को आधार बनाकर यह 70 मीटर की सीमा तय की गई थी।: नए प्रावधानों के तहत तय मापदंडों का पालन करने पर भवन की ऊंचाई कितनी भी बढ़ाई जा सकेगी।ऊंचाई का प्रतिबंध हटाने का यह फैसला केवल उन्हीं इमारतों पर लागू होगा, जिनमें अत्याधुनिक और पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम उपलब्ध होगा।पहले भवन निर्माण की फायर एनओसी लेने से पहले भवन की ऊंचाई से संबंधित दस्तावेज मांगे जाते थे, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती थी। अब इसे व्यावहारिक बनाया गया है।नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में एक और तकनीकी बदलाव करते हुए 'नेशनल बिल्डिंग कोड' की जगह 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।अब किसी भी भवन की निर्माण स्वीकृति से पहले पंजीकृत आर्किटेक्ट और संबंधित हितधारकों को 'इंडियन स्टैंडर्ड कोड' के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।यह नया कोड मुख्य रूप से भवन निर्माण स्वीकृति, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित है।शहरी विकास और आवासन विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाते हुए मॉनिटरिंग व्यवस्था को सख्त कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अगर शहरों में बिना वैध भवन स्वीकृति के किसी भी मकान या व्यावसायिक इमारत का निर्माण होता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। यूडीएच विभाग ने सभी निकायों और विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को इसकी पालना सुनिश्चित करने के लिए पाबंद कर दिया है।सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर राजस्थान के महानगरों में 'स्काईस्क्रेपर्स' बनने का रास्ता साफ होगा, वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई रफ्तार मिलेगी।खुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है। विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना। पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद

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