गोवर्धन पूजा हर साल भक्ति भाव के साथ मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा होती है। इस विशेष दिन पर लोग अत्यधिक प्रेम के साथ मुरलीधर की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके लिए कठिन व्रत का पालन करते हैं। इस दिन पूजा के दौरान Govardhan Puja 2024 कान्हा के वैदिक मंत्रों का जाप भी अवश्य करना...
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा का बड़ा धार्मिक महत्व है। इस त्योहार को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा के लिए समर्पित है। पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा हर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह आज यानी 2 नवंबर 2024 को मनाई जा रही है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जिससे आपकी पूजा में किसी भी प्रकार का विघ्न न पड़े। गोवर्धन पूजा के भोग गोवर्धन पूजा के दिन श्रीकृष्ण को 56 भोग व अन्नकूट का भोग जिसमें कई तरह की सब्जी और कढ़ी चावल का मिश्रण होता है। उसे अर्पित करने का विधान है। यदि आप किसी वजह से इन चीजों को चढ़ाने में असमर्थ हैं, तो माखन-मिश्री का भोग भी लगा सकते हैं। भगवान कृष्ण के प्रिय फूल कमल, कुमुदिनी, वैजयंती, मालती, पलाश, वनमाला, कृष्णकमल आदि। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा 02 नवंबर को यानी आज मनाई जा रही। वहीं, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 34 मिनट से 08 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग रात्रि 08 बजकर 21 मिनट से सुबह 05 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। साथ ही गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 35 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। गोवर्धन पूजा विधि भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा अनुष्ठान शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले अपने घर और उस स्थान को साफ करें, जहां भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनानी हो। साफ-सफाई के बाद घर में गाय का गोबर लाकर गोवर्धन पर्वत के साथ भगवान कृष्ण की सुंदर छवि बनाएं। देसी घी का दीपक जलाएं, रोली से तिलक करें और मौली, खील बताशे, मिठाई, फल आदि चीजें अर्पित करें। इस शुभ दिन पर अन्नकूट बनाने का विधान है, जिसमें कई तरह की सब्जी और कढ़ी चावल का मिश्रण होता है, यह विशेष भोग भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है। गौ माता को स्नान कराएं, उन्हें कुमकुम, फूल धूप, दीप, हरा चारा आदि चीजें अर्पित करें। इस दिन दान और पु्ण्य अवश्य करें। यह त्योहार इंद्र देव पर भगवान कृष्ण की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह अवसर भगवान कृष्ण की पूजा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन तामसिक चीजों से परहेज करें। शाम के समय फिर से पूजन करें और भजन - कीर्तन करें। अपने-अपने घरों को दीपक और लाइटों से रोशन करें। गोवर्धन पूजा मंत्र ॐ कृष्णाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः यह भी पढ़ें: Govardhan Puja 2024 : गोवर्धन पूजा पर ऐसे करें भगवान कृष्ण की स्तुति, दूर होंगे जीवन के सभी दुख अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा का बड़ा धार्मिक महत्व है। इस त्योहार को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा के लिए समर्पित है। पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा हर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह आज यानी 2 नवंबर 2024 को मनाई जा रही है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जिससे आपकी पूजा में किसी भी प्रकार का विघ्न न पड़े। गोवर्धन पूजा के भोग गोवर्धन पूजा के दिन श्रीकृष्ण को 56 भोग व अन्नकूट का भोग जिसमें कई तरह की सब्जी और कढ़ी चावल का मिश्रण होता है। उसे अर्पित करने का विधान है। यदि आप किसी वजह से इन चीजों को चढ़ाने में असमर्थ हैं, तो माखन-मिश्री का भोग भी लगा सकते हैं। भगवान कृष्ण के प्रिय फूल कमल, कुमुदिनी, वैजयंती, मालती, पलाश, वनमाला, कृष्णकमल आदि। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा 02 नवंबर को यानी आज मनाई जा रही। वहीं, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 34 मिनट से 08 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग रात्रि 08 बजकर 21 मिनट से सुबह 05 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। साथ ही गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 35 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। गोवर्धन पूजा विधि भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा अनुष्ठान शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले अपने घर और उस स्थान को साफ करें, जहां भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनानी हो। साफ-सफाई के बाद घर में गाय का गोबर लाकर गोवर्धन पर्वत के साथ भगवान कृष्ण की सुंदर छवि बनाएं। देसी घी का दीपक जलाएं, रोली से तिलक करें और मौली, खील बताशे, मिठाई, फल आदि चीजें अर्पित करें। इस शुभ दिन पर अन्नकूट बनाने का विधान है, जिसमें कई तरह की सब्जी और कढ़ी चावल का मिश्रण होता है, यह विशेष भोग भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है। गौ माता को स्नान कराएं, उन्हें कुमकुम, फूल धूप, दीप, हरा चारा आदि चीजें अर्पित करें। इस दिन दान और पु्ण्य अवश्य करें। यह त्योहार इंद्र देव पर भगवान कृष्ण की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह अवसर भगवान कृष्ण की पूजा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन तामसिक चीजों से परहेज करें। शाम के समय फिर से पूजन करें और भजन - कीर्तन करें। अपने-अपने घरों को दीपक और लाइटों से रोशन करें। गोवर्धन पूजा मंत्र ॐ कृष्णाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः यह भी पढ़ें: Govardhan Puja 2024: गोवर्धन पूजा पर ऐसे करें भगवान कृष्ण की स्तुति, दूर होंगे जीवन के सभी दुख अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।
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