कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा LeT के पांच गुर्गों, जिनमें दो पाकिस्तानी और तीन स्थानीय मददगार शामिल हैं, को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पांच गुर्गों को बुधवार को श्रीनगर की अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इनमें दो पाकिस्तानी नागरिक और तीन स्थानीय मददगार शामिल हैं। इस संदर्भ में एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को एक स्थानीय अदालत ने इन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इन पांचों को एक अंतर-राज्यीय LeT मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस मॉड्यूल का नेतृत्व पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा कर रहा था, जो 16 साल से फरार था और उसने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर भी सफलतापूर्वक अपने ठिकाने बना लिए थे। हुरैरा को एक अन्य पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान उर्फ खुबैब और श्रीनगर के तीन निवासियों के साथ मंगलवार को अरेस्ट किया गया था। मददगारों में मोहम्मद नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा शामिल थे। श्रीनगर की अदालत में किया गया पेश अधिकारी ने बताया कि बुधवार को इन पांचों को श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। जिसके बाद उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि पूछताछ के लिए कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस मामले में जांच अभी भी जारी है ताकि अन्य सहयोगियों, फाइनेंसरों, मददगारों, सुरक्षित ठिकानों और अंतर-राज्यीय संपर्कों की पहचान की जा सके। एक बड़े अभियान में LeT नेटवर्क का भंडाफोड़, फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में केंद्रित एक व्हाइट-कॉलर आतंकी सेल के खात्मे के छह महीने बाद हुआ है। यह सेल 10 नवंबर, 2025 को हुए लाल किला धमाके से जुड़ा था। लश्कर के वित्तीय और फंडिग के तरीकों का हुआ खुलासा अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 31 मार्च को शुरू हुआ था और इसकी निगरानी पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात कर रहे थे। इस अभियान ने LeT की फंडिंग और वित्तीय तौर-तरीकों का खुलासा किया है। उन्होंने आगे बताया कि आतंकवादियों ने न केवल जम्मू-कश्मीर में, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी अपना नेटवर्क बनाने के लिए जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया था। पिछले कुछ दिनों में, श्रीनगर पुलिस ने अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और हरियाणा में 19 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। हथियारों का जखीरा बरामद इन छापों के दौरान हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ, जिसमें चार AK असॉल्ट राइफलें, पिस्तौलें, हैंड ग्रेनेड और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट शामिल हैं। दोनों पाकिस्तानी आतंकवादियों को 'A+' ग्रेड के उग्रवादियों के तौर पर बांटा गया है। 16 साल पहले आए थे भारत: अधिकारियों ने बताया कि वे लगभग 16 साल पहले भारत में घुस आए थे और कश्मीर घाटी के अलग-अलग ज़िलों में सक्रिय रहे। इन सालों में उन्होंने लगभग 40 विदेशी आतंकवादियों को कमांड किया, जिनमें से ज़्यादातर को अब मार गिराया गया है। अब्दुल्ला और उस्मान से दूसरे राज्यों के पतों वाले जाली दस्तावेज़ बरामद हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इससे पता चलता है कि घाटी के बाहर आने-जाने में आसानी के लिए उन्होंने झूठी पहचान का इस्तेमाल किया था। जांच के नतीजों से यह भी पता चलता है कि एक विदेशी आतंकवादी जाली दस्तावेज़ों से बने एक असली पासपोर्ट पर देश के बाहर जाने में कामयाब रहा। यह भी पढ़ें- पुलवामा में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए लगाया IED; सेना ने किया डिफ्यूज यह भी पढ़ें- कौन है 'मिस्ट्री आतंकी' अबु हुरैरा? कश्मीरी युवती से निकाह कर बनाया सेफ जोन; 16 साल तक पुलिस को छकाया.
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