राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक में 30 दिन का अल्टीमेटम भजनलाल सरकार को दिया गया है। विजय बैंसला ने कहा कि सरकार के पास तीस दिन का समय है वरना कील ठोकना हमें भी आता है। मंत्रिमंडल के उप समिति केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करे, कुछ काम करें, वरना हमारी प्रेस कॉन्फ्रेंस जहां होती है वहां फिर ट्रेनें ही रुकती...
दौसा: गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की अहम बैठक बुधवार को दौसा जिले के पांचोली गांव में आयोजित की गई। बैठक में समिति अध्यक्ष विजय बैसला ने भाग लिया। उन्होंने बैठक की शुरुआत स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की और उनके आदर्शों को नमन किया। पांचोली गांव में आयोजित इस बैठक में समाज के पंच- पटेलों और बाहर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लेकर समाज की मांगों पर अपने विचार रखे। सात प्रमुख मांगें पिछले कई वर्षों से लंबित- बैसलाकरीब तीन से चार घंटे तक चली इस बैठक में समाज के उत्थान, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण संबंधी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। विजय बैसला ने बैठक में कहा कि जून में भरतपुर में महापंचायत हुई थी और उस दौरान जो समझौता पत्र तैयार हुआ था उसकी क्रियान्वित अभी तक नहीं हुई है। देवनारायण योजना के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। समाज के छात्रों को बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सात प्रमुख मांगें पिछले कई वर्षों से लंबित हैं, लेकिन मंत्रिमंडल की उप समिति के स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। गुर्जर समाज ने दिया 30 दिन का अंतिम समयबैसला ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि मंत्रिमंडल उप समिति के मंत्री समाज की बात नहीं सुन सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर समाज के बीच जाकर चर्चा करनी चाहिए। सरकार को हम 30 दिन का अंतिम समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में मांगे नहीं मानी गईं, तो गुर्जर समाज आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडलीय उप समिति केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है, काम कुछ कर नहीं रही यदि हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो फिर वहां ट्रेनें ही रुकेंगी। रूपनारायण गुर्जर के परिजनों ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग कीबैठक के दौरान आरक्षण आंदोलन में गोली लगने से घायल होने के बाद ईलाज के दौरान जान गंवाने वाले रूपनारायण गुर्जर के परिजन भी पहुंचे। परिवार की महिलाओं और पुरुषों ने विजय बैसला के समक्ष अपनी व्यथा रखी और अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के युवा, वरिष्ठजन और महिलाएं मौजूद रहीं। बैठक के अंत में समिति ने सर्वसम्मति से सरकार को 30 दिन का अल्टीमेटम देने का निर्णय लिया और कहा कि अब गुर्जर समाज अपने अधिकारों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगा।.
दौसा: गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की अहम बैठक बुधवार को दौसा जिले के पांचोली गांव में आयोजित की गई। बैठक में समिति अध्यक्ष विजय बैसला ने भाग लिया। उन्होंने बैठक की शुरुआत स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की और उनके आदर्शों को नमन किया। पांचोली गांव में आयोजित इस बैठक में समाज के पंच- पटेलों और बाहर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लेकर समाज की मांगों पर अपने विचार रखे। सात प्रमुख मांगें पिछले कई वर्षों से लंबित- बैसलाकरीब तीन से चार घंटे तक चली इस बैठक में समाज के उत्थान, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण संबंधी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। विजय बैसला ने बैठक में कहा कि जून में भरतपुर में महापंचायत हुई थी और उस दौरान जो समझौता पत्र तैयार हुआ था उसकी क्रियान्वित अभी तक नहीं हुई है। देवनारायण योजना के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। समाज के छात्रों को बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सात प्रमुख मांगें पिछले कई वर्षों से लंबित हैं, लेकिन मंत्रिमंडल की उप समिति के स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। गुर्जर समाज ने दिया 30 दिन का अंतिम समयबैसला ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि मंत्रिमंडल उप समिति के मंत्री समाज की बात नहीं सुन सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर समाज के बीच जाकर चर्चा करनी चाहिए। सरकार को हम 30 दिन का अंतिम समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में मांगे नहीं मानी गईं, तो गुर्जर समाज आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडलीय उप समिति केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है, काम कुछ कर नहीं रही यदि हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो फिर वहां ट्रेनें ही रुकेंगी। रूपनारायण गुर्जर के परिजनों ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग कीबैठक के दौरान आरक्षण आंदोलन में गोली लगने से घायल होने के बाद ईलाज के दौरान जान गंवाने वाले रूपनारायण गुर्जर के परिजन भी पहुंचे। परिवार की महिलाओं और पुरुषों ने विजय बैसला के समक्ष अपनी व्यथा रखी और अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के युवा, वरिष्ठजन और महिलाएं मौजूद रहीं। बैठक के अंत में समिति ने सर्वसम्मति से सरकार को 30 दिन का अल्टीमेटम देने का निर्णय लिया और कहा कि अब गुर्जर समाज अपने अधिकारों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगा।
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