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राजेंद्र प्रसाद सिंह की कस्टडी मौत मामले में 29 साल बाद फैसला; दरोगा को 10 वर्ष, डॉ केके जैन को 5 साल जेल

Varanasi Court Order News

राजेंद्र प्रसाद सिंह की कस्टडी मौत मामले में 29 साल बाद फैसला; दरोगा को 10 वर्ष, डॉ केके जैन को 5 साल जेल
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Varanasi Court Order: वाराणसी कोर्ट ने 29 साल पुराने एक मामले में आरोपी दो दरोगा और शहर के मशहूर डॉक्टर को आरोपी करार देते हुए सजा का ऐलान किया है। सजा की चर्चा हो रही है।

राजेंद्र प्रसाद सिंह की कस्टडी मौत मामले में 29 साल बाद फैसला; दरोगा को 10 वर्ष, डॉ केके जैन को 5 साल जेल Varanasi Court Order : वाराणसी कोर्ट ने 29 साल पुराने एक मामले में आरोपी दो दरोगा और शहर के मशहूर डॉक्टर को आरोपी करार देते हुए सजा का ऐलान किया है। सजा की चर्चा हो रही है।आपका किया गुनाह जीवन भर आपका पीछा नहीं छोड़ता। भले ही यह लाइन फिल्मी लगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में आए फैसले ने इसे एक बार फिर सही साबित किया है। दरअसल, बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद सिंह की पुलिस कस्टडी में हुई मौत मामले में 29 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला आया। कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया। इस मामले में दो दरोगा और एक मशहूर डॉक्टर के खिलाफ सजा सुनाई गई है। कस्टडी में मौत मामले में शामिल दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 वर्ष, जांच अधिकारी दरोगा राधेश्याम सिंह को छह माह और बुजुर्ग की बॉडी का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ.

केके जैन को 5 साल की सजा सुनाई गई है।घटना लंका थाना क्षेत्र की है। 5 फरवरी 1997 की घटना है। जंसा थाना क्षेत्र के बखरिया गांव के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह अपने बेटे की दवा लेने वाराणसी आए थे। वह ककरमता होते हुए महानगर बस से सुंदरपुर जा रहे थे। इसी दौरान बस में सीट को लेकर किसी यात्री से बहस शुरू हुई। मामला बढ़ा और पुलिस तक बात चली गई। सुंदरपुर पुलिस चौकी पर तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह मामले की जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे। उन्होंने राजेंद्र प्रसाद सिंह को पकड़ लिया। उन्हें पुलिस चौकी लाया गया। राजेंद्र पर बस में सवार यात्री दयाराम की जेब से 100 रुपये निकालने का आरोप लगा। आरोप है कि चौकी पर राजेंद्र प्रसाद सिंह को प्रताड़ित किया गया। उसी शाम उनकी चौकी पर ही मौत हो गई। दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह ने राजेंद्र प्रसाद सिंह की कस्टडी में मौत के बाद उनके खिलाफ चोरी का केस दर्ज कराया। मामले की जांच दरोगा राधेश्याम सिंह को सौंपी गई। राधेश्याम सिंह ने अपनी जांच में राजेंद्र प्रसाद सिंह की मृत्यु को आत्महत्या करार दिया।पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया कि मृतक राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने शॉल से पंखे में लटककर आत्महत्या कर ली। 6 फरवरी 1997 को बीएचयू में सुबह 5:30 बजे मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया। कबीर चौरा अस्पताल में तैनात डॉ.

केके जैन ने मृतक का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण लटकने के कारण दम घुटना बताया। उन्होंने पुलिस के आत्महत्या थ्योरी को सही बता दिया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह जिक्र नहीं किया गया कि आत्महत्या करने से मृतक के शरीर के अंगों की स्थिति क्या थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर मिले निशान की माप के बारे में भी नहीं बताया गया। इसके बाद पुलिस ने बिना मृतक के घरवालों को बताए 6 फरवरी 1997 को ही सुबह 7:30 बजे हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक की पत्नी शशिमा देवी मामले को उठाती रहीं। पुलिस ने मामला दर्ज ही नहीं किया। उन्होंने 11 फरवरी 1997 को मानवाधिकार आयोग में प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद दबाव बढ़ा।मानवाधिकार आयोग के मामले का संज्ञान लेने के बाद जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर श्रीकांत पांडेय ने जांच के बाद थाना लंका 15 अप्रैल 1998 को प्रार्थना पत्र दिया। सीबीसीआईडी की जांच में भी मृतक का शॉल और बैरक में पंखा ही नहीं पाया गया। 22 अप्रैल 1998 को तत्कालीन थानाप्रभारी हसन अब्बास सहित आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। जांच के बाद 11 लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग तिथियों पर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई 7 दिसंबर 2005 से शुरू हुई। अपर नगर मजिस्ट्रेट अवध मणि त्रिपाठी एवं कविंद्र नारायण सिंह को कोर्ट ने आरोप निर्धारण के समय ही डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, इंस्पेक्टर हसन अब्बास, कॉन्स्टेबल शुभ नारायण सिंह, कॉन्स्टेबल मंगरु पांडेय, कॉन्स्टेबल चंद्रमा चौधरी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अन्य पांच आरोपितों डॉ.

केके जैन, एसआई राधेश्याम सिंह, एसआई नरेंद्र प्रताप सिंह, कॉन्स्टेबल श्रीनिवास शुक्ला और कॉन्स्टेबल अनिरुद्ध यादव के खिलाफ सुनवाई हुई।वाराणसी कोर्ट ने मामले में कॉन्स्टेबल श्रीनिवास शुक्ला और कॉन्स्टेबल अनिरुद्ध यादव को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। वहीं, विशेष जज, भ्रष्टाचार निवारण अमित कुमार तिवारी की कोर्ट ने सोमवार को प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके जैन, सेवानिवृत्त दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह और राधेश्याम सिंह को दोषी करार दिया। डॉ.

केके जैन को पांच वर्ष जेल एवं 40 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। वहीं, दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 साल जेल एवं 31 हजार रुपये जुर्माना की सजा हुई। दरोगा राधेश्याम सिंह को छह माह जेल एवं एक हजार रुपये जुर्माना की सजा हुई। जुर्माने की आधी राशि पीड़ित परिवार को दी जाएगी। केस में 12 गवाह पेश किए गए।राहुल पराशर नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्‍होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है। विशेषज्ञता- राजनीतिक खबरों का विश्लेषण, क्राइम की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासनिक हलचल को लेकर इनसाइड स्टोरी, सरकार के फैसलों का आम लोगों पर असर का विश्लेषण। पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्‍स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्‍थान की ओर से सम्‍मानित किया गया है। शिक्षा: राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।की ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद

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