Why Dutch government control chipmaker Nexperia: यूरोप की धरती से ऐसी खबर सामने आई जिसके बाद पूरी दुनिया हैरान है. नीदरलैंड सरकार ने अचानक चीनी मालिक वाली चिप कंपनी नेक्स्पेरिया पर कब्जा कर लिया. यूरोप में वर्ल्ड वॉर 2 के बाद सरकारी कानून के दमपर किसी विदेशी कंपनी पर इस तरह कब्जा किया गया है.
US-china Chip War: यूरोप में वर्ल्ड वॉर 2 के बाद जो हुआ है, उसकी कल्पना आप नहीं कर सकते. लेकिन नीदरलैंड्स सरकार ने कुछ इसी तरह अपना कदम उठाया है. इससे पहले आप सब अपना दिमाग पर जोर दे, हम आपको बता दें कि नीदरलैंड्स ने चीन की एक बहुत बड़ी कंपनी पर कब्जा कर लिया है.
नीदरलैंड्स सरकार ने गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट नाम के कोल्ड वॉर वाले कानून को पहली बार यूज करके कब्जा कर लिया है. यह कानून करीब 73 साल पुराना है. यही नहीं वर्ल्ड वॉर 2 के बाद यूरोप में किसी विदेशी कंपनी पर सरकारी कब्जे का यह पहला केस है. नेक्स्पेरिया क्या है और क्यों खास? नेक्स्पेरिया एक डच चिप मेकर है, जो नीदरलैंड्स के शहर निमेगेन में बसी है.ये कारों, मोबाइल्स और कंज्यूमर गैजेट्स के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स बनाती है.ये चिप्स यूरोप की टेक चेन का अहम हिस्सा हैं. 20 साल पहले ये फिलिप्स से निकली थी, लेकिन 2019 में चाइना की विंगटेक टेक्नोलॉजी ने इसे खरीद लिया.अब ये कंपनी चाइना की हो गई, लेकिन बेस यूरोप में ही है. डच सरकार का बहुत बड़ा कदम न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक,डच सरकार ने चीनी स्वामित्व वाली कंप्यूटर चिप निर्माता कंपनी नेक्सपीरिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है, जिससे टेक्टोनिक इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर पूरी दुनिया में एक जंग छिड़ गई है. जिसमें सबका दुश्मन चीन है. यानी हर देश से चिप के मामल में बीजिंग के साथ तनाव बढ़ गया है. वर्ल्ड वॉर 2 के बाद पहला केस जिस तरह नीदरलैंड्स सरकार ने नेक्सपेरिया पर कब्जा किया है. यह वर्ल्ड वॉर 2 के बाद यूरोप में पहली बार हुआ है. शीत युद्ध के समय इस कानून का उपयोग किया गया था. इस मामले में सोमवार रात को जब डच इकोनॉमिक अफेयर्स मिनिस्ट्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा उन्होंने गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट नाम का पुराना कानून इस्तेमाल किया, जो बहुत कम यूज होता है. गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट एक बहुत ही पुराना कानून है. ये एक्ट इमरजेंसी में सामान की सप्लाई बचाने के लिए है. किस कानून के दमपर कर लिया कब्जा? क्या होगा फायदा इसी कानून के आधार पर डच मिनिस्ट्री ने कहा कि चीन की कंपनी के गवर्नेंस में गंभीर कमियां हैं, जो डच और यूरोपीय मिट्टी पर जरूरी टेक नॉलेज को खतरे में डाल रही हैं. यानी कब्जा करने पर डच सरकार का एजेंडा बहुत क्लियर है कि यूरोप की टेक नॉलेज को चाइना शिफ्ट हर हाल में रोकना है. इसके साथ ही अब मिनिस्टर ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स कंपनी के फैसलों को ब्लॉक या रिवर्स कर सकते हैं, अगर वो कंपनी, डच-यूरोपीय फ्यूचर या वैल्यू चेन को नुकसान पहुंचाएं. और सबसे अच्छी बात ये कि रेगुलर प्रोडक्शन जारी रहेगा. विंगटेक ने जताया विरोध, शेयरों पर ब्रेक लगी चीनी पैरेंट कंपनी विंगटेक ने डच सरकार का जोरदार विरोध किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ये कमर्शियल मसलों का पॉलिटिसाइजेशन है. स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि ये जियोपॉलिटिकल बायस पर बेस्ड एक्सेसिव इंटरवेंशन है, न कि फैक्ट्स पर. उनका कहना है कि नेशनल सिक्योरिटी का बहाना बेबुनियाद है, जिसके बाद शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर विंगटेक के शेयर 10% गिर गए. कंपनी ने कहा कि उनका कंट्रोल टेम्परेरी रिस्ट्रिक्टेड है, लेकिन इकोनॉमिक बेनिफिट्स उनके पास ही रहेंगे. वो लीगल सहायता लेंगे, शेयरहोल्डर्स के राइट्स बचाएंगे और चाइनीज गवर्नमेंट से सपोर्ट मांगेंगे. नेक्स्पेरिया ने अब तक इस मामले में कमेंट नहीं दिया है. ट्रंप इस खेल के पीछे? दुनिया में चिप्स जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर कंट्रोल की चल जंग के बीच इस घटना ने आग लगा दी है. ये घटना चाइना और वेस्ट के बीच टेक वॉर का हिस्सा है. डच सरकार के इस कदम के पीछे लोग ट्रंप का हाथ बता रहे हैं, क्योंकि ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही चाइनीज गुड्स पर 100% टैरिफ की धमकी दी थी. खासकर ट्रंप की नजर चीन के रेयर अर्थ्स एक्सपोर्ट कंट्रोल्स पर है. जिससे अमेरिका नाखुश है. ट्रंप बिल्कुल नहीं चाहते कि चीन का किसी भी मामले में दबदबा हो, यही ट्रंप की पॉलिसी ने यूएस-नीदरलैंड्स को चिप एक्सपोर्ट कंट्रोल्स पर करीब ला दिया. मकसद एक है चाइना को टेक में पीछे धकेलना.
Trump Pressure US China Tech War Dutch Seizure Chinese CEO Export Controls Wingtech Shares Goods Availability Act Geopolitical Bias European Security Trump Tariffs Rare Earths Semiconductor Supply US Netherlands Cooperation Court Documents नेक्स्पेरिया कब्जा ट्रंप दबाव यूएस चीन टेक युद्ध डच जब्ती चीनी सीईओ निर्यात नियंत्रण विंगटेक शेयर गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह यूरोपीय सुरक्षा ट्रंप टैरिफ रेयर अर्थ्स सेमीकंडक्टर सप्लाई यूएस नीदरलैंड्स सहयोग कोर्ट दस्तावेज
इंडिया ताज़ा खबर, इंडिया मुख्य बातें
Similar News:आप इससे मिलती-जुलती खबरें भी पढ़ सकते हैं जिन्हें हमने अन्य समाचार स्रोतों से एकत्र किया है।
जरूरत की खबर- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना बंद: अब सोने में निवेश के क्या हैं विकल्प, कैसे मिलेगा ज्यादा रिटर्न...Sovereign Gold Bond Scheme Discontinued Explained; Why Modi government stopped SGB scheme SGB योजना बंद होने के बाद अब गोल्ड में निवेश करने का बेहतर विकल्प क्या है?
और पढो »
Atishi Seeks AAP Leaders’ Meeting With Delhi CM Rekha Gupta Over Women’s Aid SchemeAtishi questioned why the scheme was not approved in the new government’s first cabinet meeting, despite Prime Minister Narendra Modi’s promise at an election rally.
और पढो »
India-Banglades: হিন্দুদের রক্ষা করা বাংলাদেশের অন্তর্বর্তী সরকারের দায়িত্ব, হুঁশিয়ারি দিল্লির...This is responsibility of the interim government of Bangladesh to protect Hindus claim by Indian Government
और पढो »
Why Heat Wave in Spring: কেন মধুর বসন্তেই ভয়ংকর দাবদাহের মতো পরিস্থিতি? কেন বাংলায় এখনই লু-র চোখরাঙানি?Why Heat Wave in Spring time why wind so dry and hot before summer know science Bengal weather update Kolkata weather
और पढो »
Starlink सर्विस लॉन्च से पहले केंद्र सरकार ने रखी बड़ी शर्त, कहा- भारत में बने कंट्रोल सेंटरcentral government big condition to starlink Before launching open control centre in india Starlink सर्विस लॉन्च से पहले केंद्र सरकार ने रखी बड़ी शर्त, कहा- भारत में बने कंट्रोल सेंटर गैजेट्स
और पढो »
Sheikh Hasina: হাসিনাকে কেন বাংলাদেশে পুশইন করছে না ভারত? প্রশ্ন...BNP leader Rizvi asked to media that why Indian government is not pushing in Sheikh Hasina to Bangladesh
और पढो »




