जिसके दादा, बीवियां, बच्चे खुद विदेशी, वही ट्रंप अमेरिका आने वालों पर उठा रहे उंगली

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जिसके दादा, बीवियां, बच्चे खुद विदेशी, वही ट्रंप अमेरिका आने वालों पर उठा रहे उंगली
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The Story of Donald Trump’s Grandfather: डोनाल्ड ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय जड़ें उन्हें अन्य अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बीच अलग खड़ा करती हैं. पिछले दस राष्ट्रपतियों में केवल दो- ट्रंप और बराक ओबामा- के माता-पिता संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर पैदा हुए थे. इसी तरह ट्रंप का अपना इमीडिएट परिवार भी अंतरराष्ट्रीय रहा है.

The Story of Donald Trump ’s Grandfather: दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने वाले डोनाल्ड ट्रंप आप्रवासियों के बेटे और पोते हैं. वह अपने पिता की तरफ से जर्मन और मां की तरफ से स्कॉटिश हैं. उनके दादा-दादी और उनके माता-पिता में से कोई भी संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा नहीं हुआ था.

उनके परिवार का कोई सदस्य मातृभाषा के रूप में अंग्रेजी नहीं बोलता था. ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय जड़ें उन्हें अन्य अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बीच अलग खड़ा करती हैं. पिछले दस राष्ट्रपतियों में से केवल दो – ट्रंप और बराक ओबामा – के माता-पिता संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर पैदा हुए थे. डोनाल्ड ट्रंप का अपना इमीडिएट परिवार भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय रहा है. उनकी तीन पत्नियों में से दो मूल रूप से चेक गणराज्य और स्लोवेनिया से थीं. उनके पांच बच्चों में से केवल एक, टिफनी दो अमेरिकी मूल के नागरिकों की संतान है. जबकि उनकी बेटी इवांका अमेरिकी इतिहास में प्रथम परिवार की पहली यहूदी सदस्य हैं. कब और कैसे आए थे ट्रंप के दादा खचाखच भरा पानी का जहाज एस.एस. ईडर 17 अक्टूबर, 1885 को अमेरिका के पहले आव्रजन केंद्र, न्यूयॉर्क शहर के कैसल गार्डन में पहुंचा. जर्मनी से सैकड़ों भावी अमेरिकियों ने उत्तरी अटलांटिक में अपने नए घर के लिए 10 दिनों की यात्रा की थी. उनमें एक दुबला-पतला, हल्के बालों वाला 16 साल का लड़का था, जो अपना गृहनगर, शराब बनाने वाला एक छोटा सा गांव छोड़कर आया था. जहां कड़ी मेहनत करने का मतलब बस गुजारा करना होता था. वो थे फ्रेडरिक ट्रंप जो डेक पर खड़े थे और न्यूयॉर्क हार्बर की अपनी पहली झलक का इंतजार कर रहे थे. ये भी पढ़ें- Explainer: राष्ट्रपति बनते ही भारत में नहीं चलता मुकदमा, तो क्या होगा अमेरिका में ट्रंप का नाई का काम करते थे दादा लेखिका ग्वेंडा ब्लेयर ने अपनी किताब, ‘द ट्रम्प्स: थ्री जेनरेशन दैट बिल्ट एन एम्पायर’ में लिखा है, “फ्रेडरिक ट्रंप के पास बहुत कुछ नहीं था. नाई का काम जानने वाला यह युवा एक छोटे सूटकेस में केवल कुछ कपड़े भरकर लाया था. वह अंग्रेजी बोलना और लिखना भी नहीं जानते थे. उनके पास हाई स्कूल डिप्लोमा जैसा कुछ भी नहीं था. वह केवल साक्षर थे, लेकिन जर्मन भाषा में.” उस किशोर ने अपना भाग्य बनाना शुरू किया. फ्रेडरिक ने अपने गृहनगर की लड़की एलिजाबेथ क्राइस्ट से शादी की. उनके तीन बच्चे हुए. उनके दूसरे बच्चे, फ्रेडरिक क्राइस्ट ट्रंप ने 1940 और 1950 के दशक में परिवार के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का विस्तार किया. उन्होंने मैरी ऐनी मैकलियोड से शादी की और उनके पांच बच्चे हुए. ये भी पढ़ें- Explainer: कैसे मिलती है किसी देश को ओलंपिक मेजबानी, क्या है उसकी प्रक्रिया आज हैं अप्रवासियों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप उनके परिवार का चौथा बच्चा थे. तब कोई नहीं जानता था कि डोनाल्ड परिवार में सबसे मशहूर बन जाएंगे. डोनाल्ड अब अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति होंगे. शायद इसे ही भाग्य का लेखा कहते हैं जिस ट्रंप के दादा, दादी, माता-पिता, पत्नी और बच्चे तक अमेरिकी नहीं हैं वो अपनी कठोर आव्रजन नीतियों के लिए जाने जाते हैं. वह हमेशा अप्रवासी के तौर पर अमेरिका आने वालों का विरोध करते रहे हैं. जरा सोचिए अगर उस दौर में ऐसा किसी राष्ट्रपति ने किया होता तो उनके परिवार के मुखिया को अमेरिका में आने से रोक दिया गया होता. 2016 में ट्रंप बने 45वें राष्ट्रपति विशेषज्ञों का कहना है कि आज की नीतियों के तहत, फ्रेडरिक ट्रंप को एक अकेले नाबालिग या ‘बिना साथी के विदेशी बच्चे’ के रूप में माना जाता. जब तक कि उनकी बड़ी बहन को उनके अभिभावक के रूप में नियुक्त नहीं किया गया था. उनके आगमन के समय उनकी बड़ी बहन अमेरिका में उनकी एकमात्र रिश्तेदार थीं. उन्हें उस श्रेणी में डाल दिया गया होता जिसे आप्रवासन जगत के लोग रॉकेट डॉकेट कहते हैं. एक सदी से भी अधिक समय के बाद 2016 में फ्रेडरिक ट्रंप के पोते डोनाल्ड ट्रंप अपने दादा के गोद लिए गए देश के 45वें राष्ट्रपति बने. ट्रंप 2020 में अगला चुनाव जो बाइडन से हार गए, लेकिन 2024 में उन्होंने डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को बड़े अंतर से शिकस्त दी. ये भी पढ़ें- रतन टाटा को विरासत में मिली थीं कीमती बंदूकें, जानें किसे मिला उनका मालिकाना हक जर्मन विरासत को नकारने का किया काम हालांकि यह हैरान करने वाला है कि दशकों तक ट्रंप ने अपनी जर्मन विरासत को पूरी तरह से नकारने का काम किया. उन्होंने यह दावा किया कि उनके दादा की जड़ें उत्तर की ओर, स्कैंडिनेविया में थीं. ट्रंप ने अपनी सह-लिखित किताब ‘द आर्ट ऑफ द डील’ में लिखा, “वह एक बच्चे के रूप में स्वीडन से यहां आए थे.” लेकिन उनके चचेरे भाई और परिवार के इतिहासकार जॉन वाल्टर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, “ट्रंप ने अपने पिता फ्रेड ट्रंप के कहने पर यह चाल चली थी. उन्होंने अपने जर्मन वंश को इसलिए बदलने की कोशिश की ताकि उनके यहूदी दोस्त और ग्राहक उनके जर्मन मूल को लेकर परेशान न हों.” ये भी पढ़ें- Explainer: झारखंड विधानसभा चुनाव में कौन सी हैं वो 28 सीटें जो खोल सकती हैं किसी भी पार्टी की किस्मत का ताला हकीकत तो यही थी कि ट्रंप परिवार के सदस्यों ने बार-बार अपनी जर्मन विरासत को छुपाने की कोशिश की है. लेकिन अपने पहले कार्यकाल में नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने स्वीकार किया कि उनके पिता जर्मनी से आए थे. वास्तव में, फ्रेडरिक क्राइस्ट ट्रंप का जन्म राष्ट्रपति के दादा, फ्रेडरिक ट्रंप के पहली बार आने के 20 साल बाद न्यूयॉर्क में हुआ था.

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