जिम ट्रेनर का होंठ गायब, सिर फटा, पुलिस बोली-डूबकर मरा: भाई बोला- पुलिसवालों ने पीटकर तालाब में फेंका, गोमा...

Roorkee Gym Trainer Wasim Death CBI समाचार

जिम ट्रेनर का होंठ गायब, सिर फटा, पुलिस बोली-डूबकर मरा: भाई बोला- पुलिसवालों ने पीटकर तालाब में फेंका, गोमा...
AlauddinRoorkee Jim Trainer Wasim Qureshi Monu RooriGau Raksha

सिर और आंखों के नीचे चोट के निशान, नीचे का होंठ गायब, खून से लथपथ चेहरा। बॉडी बिल्डर वसीम की डेडबॉडी घर के पास एक तालाब में इसी हालत में मिली थी। परिवार का आरोप है कि घर लौटते वक्त पुलिस ने उसे रोका था। URL: Roorkee Muslim Gym Trainer Death Case Wasim Qureshi Monu Meta Title; Roorkee Muslim Gym Trainer Death Case; Wasim Qureshi | Monu Meta...

भाई बोला- पुलिसवालों ने पीटकर तालाब में फेंका, गोमांस मिलने की थ्योरी कितनी सचसिर और आंखों के नीचे चोट के निशान, नीचे का होंठ गायब, खून से लथपथ चेहरा। बॉडी बिल्डर वसीम की डेडबॉडी घर के पास एक तालाब में इसी हालत में मिली थी। परिवार का आरोप है कि घर लौटते वक्त पुलिस ने उसे रोका था। सवाल पूछने पर बुरी तरह पीटा और तालाब में फेंक दउत्तराखंड के रुड़की में रहने वाले वसीम की मौत 25 अगस्त, 2024 को हुई थी। 10 महीने तक उसका परिवार पुलिस अफसरों के चक्कर काटता रहा। 10 महीने तक इस केस की फाइलें बंद रहीं। 2 जुलाई, 2025 को हरिद्वार की सेशन कोर्ट के एक फैसले ने पूरा केस पलट दिया। कोर्ट ने 6 पुलिसवालों को आरोपी माना और FIR दर्ज कर जांच के आदेश दिए। इस मामले की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर रुड़की पहुंचा। हम उस जगह भी गए, जहां वसीम की लाश मिली थी। हमने उसके परिवार से बात की। पुलिस के खुलासे और अब तक की कार्रवाई को समझा।वसीम का गांव सलाहपुर गड़ा रुड़की से करीब 12 किमी दूर है। यहां लोग जिम ट्रेनर मोनू का नाम लेने भर से उसके घर का पता बता देते हैं। वसीम का एक नाम मोनू भी था।गेट खटखटाने पर वसीम के चचेरे भाई अलाउद्दीन बाहर आए। अलाउद्दीन की अपील पर ही हरिद्वार कोर्ट ने आरोपी पुलिसवालों की जांच के आदेश दिए हैं। हमने अलाउद्दीन से पूछा- वसीम के साथ क्या हुआ था? वे कहते हैं, '24 अगस्त, 2024 की रात करीब 11 बजे वसीम जिम बंद करके बहन के घर खाना खाने गया था। उसकी बड़ी बहन रेशमा की शादी बगल के माधोपुर गांव में हुई है। वो कुछ अच्छा बनाती थी, भाई को बुला लेती थी। वो खाना खाकर घर लौट रहा था। रात करीब 1:30 बजे रास्ते में उसे 6 पुलिसवालों ने रोक लिया। वो जबरदस्ती उसकी तलाशी लेने लगे।' 'वसीम ने उनसे वजह पूछी तो पुलिसवाले भड़क गए। उन्होंने रास्ते में ही मेरे भाई को लाठियों से मारना शुरू कर दिया। फिर उसे सड़क के पास तालाब में फेंक दिया। वसीम जोर-जोर से चीख रहा था। उसकी आवाज सुनकर गांव के कुछ लोग उसे बचाने के लिए पहुंचे। पुलिस ने उन्हें धमकाया कि अगर इस मैटर में घुसोगे तो गोली मार देंगे। लोगों ने इस घटना का वीडियो भी बनाया था।' ये वसीम की मौत के वक्त का वीडियो है। तब तालाब के पास भारी भीड़ जुटी थी। लोगों की पुलिस से बहस भी हुई थी। ‘सुबह करीब 5 बजे माघोपुर में रहने वाले हमारे एक रिश्तेदार ने बताया कि वसीम को पुलिस ने बहुत मारा है। उसकी हालत सीरियस है। तुम लोग जल्दी आ जाओ। हम लोग वहां पहुंचे तो देखा कि करीब 50 पुलिसवाले तालाब को घेरकर खड़े थे। वसीम की डेडबॉडी पानी में थी।’ ‘वसीम के अब्बू मो.

नसीम ये सब देखकर जोर-जोर से चीखने लगे। उन्होंने वसीम के पास जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिसवालों ने उनसे कहा कि तुम्हारे बेटे ने गाय काटी है। ज्यादा हंगामा करोगे, तो पूरे परिवार को जेल में डाल देंगे।' ‘सुबह 8 बजे वसीम की डेडबॉडी तालाब से निकाली गई। दोपहर 2 बजे से पहले पोस्टमॉर्टम करा दिया गया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच डेडबॉडी को दफन करवा दिया गया।’‘वसीम डूबकर मरा, तो उसके शरीर में चोटें कैसे लगीं’ अलाउद्दीन पूरे मामले में पुलिस के रवैये पर शक जताते हैं। वे कहते हैं, ‘पुलिस कह रही है कि वसीम की मौत डूबने से हुई है। ये झूठ है। उसकी डेडबॉडी निकाली गई, तब उसका चेहरा बुरी तरह फटा हुआ था। होंठ गायब थे और सिर पर गहरी चोट के निशान थे। उसके शरीर पर टी-शर्ट नहीं थी। अगर कोई खुद से पानी में कूदेगा, तो क्या पहले ये सोचेगा कि टीशर्ट उतारकर पानी में कूदूं। वसीम तैरना जानता था। हम कैसे मान लें कि उसकी मौत डूबने से हुई है। ‘वसीम की मौत के बाद हमने गंगनहर थाने में लिखित शिकायत दी। हमारी शिकायत दर्ज नहीं की गई। जनरल डायरी में लिख लिया गया। 10 महीने तक हम उसकी हत्या का केस दर्ज करवाने के लिए SP ऑफिस के चक्कर लगाते रहें, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। हमने हरिद्वार लोअर कोर्ट में अपील डाली। अब फैसला हमारे हक में आया है।’ अलाउद्दीन आगे कहते हैं, ‘मेरा भाई वसीम स्टेट लेवल बॉडी बिल्डिंग चैंपियन था। उसने कभी किसी को थप्पड़ तक नहीं मारा। पुलिस बोल रही है कि वसीम ने गाय काटी। 22 साल के लड़के को 6 पुलिसवालों ने मरने तक पीटा। उसका सिर फाड़ दिया, चेहरा कुचल दिया। उसने बचने की कोशिश की, लेकिन उसे तालाब में फेंक दिया गया। उसके कातिल पुलिसवाले आज भी ड्यूटी कर रहे हैं।' वसीम के परिवार ने सब-इंस्पेक्टर शरद सिंह, कॉन्स्टेबल सुनील और प्रवीण सैनी सहित 6 पुलिसवालों पर हत्या का आरोप लगाया है।वसीम की मौत के बाद उसकी मां समा परवीन सदमे में हैं। उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती। वालिद मो. नसीम भतीजों की मदद से हत्या का केस लड़ रहे हैं। बेटे को याद करते हुए नसीम कहते हैं, ‘वो 4 भाइयों में सबसे बड़ा था। 5 बहनों का चहेता भाई।’ वसीम जिम में ट्रेनिंग देता था। परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी। खाली वक्त में AC, फ्रिज-कूलर रिपेयर करता था। ‘हम तो उम्मीद छोड़ चुके थे। हरिद्वार कोर्ट ने हमारे मामले को गंभीरता से लिया और पुलिसवालों पर केस दर्ज करने के लिए कहा है। हम जज साहब का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने हमारी बात सुनी और दोबारा सुनवाई शुरू की है। हम यही चाहते हैं कि बेटे की मौत की CBI जांच हो।’वसीम की मौत के आरोपी पुलिसवाले हैं। पुलिस ही उनकी जांच कर रही है। ऐसे में निष्पक्ष तरीके से जांच होगी, इस पर शक है। इसलिए CBI जांच की जाए।वसीम घर के इकलौते कमाने वाले थे। अब घर में कोई बड़ा नहीं है। ऐसे हालात में परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ कोई घटना हो सकती है। इसलिए परिवार को सुरक्षा दी जाए।पुलिसवाले इस केस के गवाहों को धमका रहे हैं। गवाहों की कमी इस केस में रुकावट डाल सकती है। ऐसे पुलिस वालों पर कार्रवाई हो।वसीम के परिवार से मिलने के बाद हम उस तालाब पर गए, जहां वसीम की डेडबॉडी मिली थी। ये तालाब माधोपुर कस्बे में है। यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर हैं या कबाड़ का काम करते हैं। हमने तालाब के किनारे रहने वाले लोगों से वसीम के बारे में पूछा। उन्होंने बात तो की, लेकिन कैमरा पर आने के लिए तैयार नहीं हुए। तालाब के किनारे रहने वाले एक शख्स ने बताया, ‘पुलिसवालों ने उस रात वसीम को खूब पीटा। वो हाथ जोड़कर माफी मांग रहा था। उन लोगों ने उसकी बात नहीं सुनी। वसीम के चिल्लाने की आवाज सुनकर हम लोग बाहर आ गए। पुलिसवालों ने हमें डांटा और घर के अंदर जाने के लिए कहा।’रुड़की पुलिस ने जांच रिपोर्ट में बताया है कि घटना वाले दिन उत्तराखंड पुलिस की गौ संरक्षण स्क्वॉड माघोपुर में गश्त पर निकली थी। इसी बीच एक शख्स स्कूटर से आया। वो पुलिस को देखकर स्कूटर छोड़कर भागने लगा। पुलिस को उसकी गाड़ी से मांस के पैकेट मिले। पुलिस ने संदिग्ध को पकड़ने की कोशिश की। वो बचने के लिए तालाब में कूद गया। डूबने की वजह से उसकी मौत हो गई। उसकी पहचान वसीम के तौर पर हुई। रुड़की पुलिस के मुताबिक, जांच में ये भी सामने आया है कि वसीम को पकड़ा गया तो कुछ लोकल लोग उसे छोड़ने के लिए पुलिस को धमकाने लगे। 100-150 लोगों की भीड़ ने वसीम को भगाने की कोशिश की। लोगों ने स्कूटी और बरामद मांस को गायब कर दिया। इस पर थाना पुलिस ने कुछ लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया था। पुलिस ने दावा किया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि वसीम के शरीर पर चोटें किसी सख्त चीज से टकराने की वजह से आई हैं। उसका निचला होंठ पंगेसियस मछली के काटने से गायब हुआ है। पुलिस की ओर से दर्ज FIR में लिखा है कि वसीम के पास से कुल 50 किलो मांस मिला। इसमें 15 किलो गोमांस होने का शक था।वसीम की मौत के बाद उसके भाई अलाउद्दीन ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए सबूत दिखाए। इन्हें गंभीर मानते हुए हरिद्वार कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने कहा- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर 6 चोटों के निशान दिखाए गए हैं। इससे पता चलता है कि वसीम को बुरी तरह पीटा गया था। जांच रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि आरोपी पुलिसवाले घटना वाली जगह मौजूद थे। इसलिए, इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि आरोपियों ने वसीम को पीटा होगा और उसे तालाब में फेंक दिया। कोर्ट ने गंगनहर कोतवाली पुलिस को SI शरद सिंह समेत 6 पुलिसवालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए। इसके अलावा SSP हरिद्वार से कहा कि मामले की जांच CO रैंक के अधिकारी से कराई जाए । इस फैसले के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इस पर हमने गंगनहर थाने के इंस्पेक्टर आरके सकलानी से बात की। उन्होंने बताया, ‘लोअर कोर्ट के आदेश के बाद हमने इस मामले में रिवीजन अपील दाखिल कर अपना पक्ष रखा। हमने 6 पुलिसवालों पर FIR दर्ज न करने की बात कही।' 'मामले पर सुनवाई करते हुए डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज अनिरुद्ध भट्ट की कोर्ट ने CJM कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।'पंजाब में टीचर की मौत, एक्सीडेंट या पुलिस का टॉर्चर, पत्नी बोलीं- शरीर पर चोट के 16 निशान पंजाब के बठिंडा में रहने वाले नरिंदर टीचर थे। एक दिन पढ़ाने गए और घर नहीं लौटे। हॉस्पिटल में उनकी डेडबॉडी मिली। आरोप है कि पुलिस ने नरिंदर को पकड़ा था। उनकी पत्नी नैंसी कहती हैं- 'पति की मौत को डेढ़ महीने से ज्यादा हो गए। पुलिस से हजार बार पूछ चुकी हूं कि मेरे पति को पकड़ा क्यों था। उनके शरीर पर चोट के 16 निशान थे, बिल्कुल एक जैसे। प्राइवेट पार्ट तक नहीं छोड़ा।पलामू, गढ़वा समेत 6 जिलों में भारी बारिश की संभावनाआगरा के थाने, महोबा के स्कूल में पानी ही पानीकोटा के गढ़ पैलेस में किया वायु धारणा परीक्षणरायपुर में तेज बारिश, दोपहर में छाया अंधेरा

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